New Delhi (के. के. उपाध्याय) : मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर देश में सियासी घमासान तेज हो गया है। विपक्ष जहां मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है, वहीं भाजपा ने इन आरोपों का जवाब देने के लिए देशव्यापी जनसंपर्क अभियान शुरू करने की तैयारी कर ली है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की ओर से दाखिल हलफनामे के बाद चुनावी प्रक्रिया को लेकर बहस और तेज हो गई है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली का आह्वान किया है। कांग्रेस और सहयोगी दल इसे मतदाता अधिकारों की रक्षा से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि भाजपा ने इसका जवाब देने के लिए मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को मैदान में उतारने की योजना बनाई है।
विवाद की वजह बनी तेरह करोड़ प्रविष्टियां
SIR के दौरान करीब तेरह करोड़ प्रविष्टियों के मसौदा सूची से बाहर होने के आंकड़े को विपक्ष ने बड़ा मुद्दा बनाया है। विपक्ष का कहना है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता और पात्र नागरिकों के मतदान अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए। हालांकि मृत मतदाताओं के नाम हटाना, दोहरी प्रविष्टियां खत्म करना, स्थानांतरित मतदाताओं का विवरण सुधारना और किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाना अलग अलग स्थितियां हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि हटाई गई प्रविष्टियों में कितने पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से बाहर हुए और उनकी शिकायतों का समाधान कैसे हो रहा है।
हलफनामे पर टिकी नजर
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 के आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से जारी किए गए थे। हलफनामे में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की निर्णय प्रक्रिया में सहभागिता का जिक्र किया गया है। आयोग ने कहा है कि फाइलों पर दर्ज टिप्पणियां और सुझाव अंतिम निर्णय नहीं होते, अंतिम फैसला तय प्रक्रिया और मंजूरी के बाद ही लागू होता है। आयोग ने यह भी कहा कि आंतरिक कार्य विभाजन से जुड़ा एक आदेश लागू नहीं हुआ था और आंतरिक प्रशासनिक मतभेदों को SIR के अंतिम आदेशों से अलग रखा जाना चाहिए। साथ ही आयोग ने कहा कि किसी अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट अपने आप में न्यायिक प्रमाण नहीं बन जाती। हालांकि हलफनामे में पेश पक्ष को अदालत का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता और इस पर कानूनी जांच जारी है।
फॉर्म-6 को लेकर भी आयोग ने पक्ष रखा है। आयोग के अनुसार फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है और SIR के तहत इस्तेमाल किया गया अतिरिक्त घोषणा पत्र अलग दस्तावेज है।
एक नवंबर को दोनों दलों की नजर
एक नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित कांग्रेस की रैली को SIR के खिलाफ चल रहे अभियान की अहम कड़ी माना जा रहा है। राहुल गांधी ने किसानों, मजदूरों, युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों और व्यापारियों से रैली में शामिल होने की अपील की है। वहीं भाजपा ने इसके जवाब में देशभर में पदयात्राओं और जनसंपर्क कार्यक्रमों की तैयारी की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक नवंबर को लखनऊ में पदयात्रा प्रस्तावित है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का शिमला में कार्यक्रम बताया जा रहा है। इसके अलावा राजनाथ सिंह, देवेंद्र फडणवीस और पुष्कर सिंह धामी सहित कई वरिष्ठ नेता अभियान में शामिल होंगे। भाजपा ने इस अभियान को लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ नाम दिया है।
कुल मिलाकर SIR का मुद्दा अब राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि मतदाता सूची से त्रुटियां दूर हों और हर पात्र नागरिक का वोट सुरक्षित रहे, वहीं राजनीतिक दलों से भी अपने दावों के समर्थन में तथ्य रखने की उम्मीद की जाती है।

