Farmer Protest: किसान एकता संघ की चेतावनी, मांगें पूरी नहीं हुईं तो नवंबर के दूसरे सप्ताह में यमुना प्राधिकरण पर करेंगे तालाबंदी
नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में किसानों की लंबित मांगों को लेकर किसान एकता संघ ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। रविवार दोपहर एक बजे जेवर क्षेत्र के दनकौर में किसान एकता संघ की बैठक आयोजित की गई। बैठक में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सामने हुए किसान आंदोलन की समीक्षा की गई और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता जोरा भाटी ने की, जबकि संचालन जिला अध्यक्ष पप्पे नागर ने किया। इसमें किसान नेताओं और संगठन के पदाधिकारियों ने प्राधिकरण से जुड़ी समस्याओं तथा अपनी लंबित मांगों पर विचार-विमर्श किया।
किसान एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सोरन प्रधान ने बैठक में बताया कि पुलिस की ओर से किसानों को 29 अक्टूबर को यमुना प्राधिकरण में अधिकारियों के साथ बातचीत कराने का भरोसा दिया गया है। उन्होंने कहा कि किसान इस बातचीत के परिणाम का इंतजार करेंगे, लेकिन यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो नवंबर के दूसरे सप्ताह में यमुना प्राधिकरण कार्यालय पर तालाबंदी की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि संगठन अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है और करीब चार हजार किसान जेल जाने तक के लिए तैयार हैं। उनके मुताबिक, किसानों की मांगों का समाधान होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
किसान संगठन की प्रमुख मांगों में किसानों को 10 प्रतिशत विकसित आबादी भूखंड देना, आबादी से जुड़े लंबित मामलों का निस्तारण करना और वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मिलने वाले लाभ उपलब्ध कराना शामिल है। किसान नेताओं का कहना है कि इन मांगों को लेकर लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें अपेक्षित समाधान नहीं मिला है। उनका मानना है कि किसानों की जमीन से जुड़े मुद्दों का निपटारा किए बिना क्षेत्र में असंतोष बना रहेगा। सोरन प्रधान ने स्पष्ट किया कि 29 अक्टूबर को प्रस्तावित बातचीत के बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी। यदि वार्ता में मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता है तो संगठन तालाबंदी के कार्यक्रम को आगे बढ़ाएगा।
बैठक में चौधरी बाली सिंह, देशराज नागर समेत कई पदाधिकारी और किसान प्रतिनिधि शामिल हुए। नेताओं ने किसानों से संगठन की ओर से तय कार्यक्रम के लिए तैयार रहने की अपील की। बैठक में आंदोलन के पिछले चरण की समीक्षा के साथ आगे की कार्रवाई पर चर्चा की गई। किसान एकता संघ ने स्पष्ट किया कि उसकी प्राथमिकता लंबित मांगों का समाधान कराना है, लेकिन यदि अधिकारियों की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा.





