Vehicle Fitness Noida: नोएडा में बिना फिटनेस जांच वाले व्यावसायिक वाहन तीन फीसदी से कम
जिले में बिना फिटनेस जांच व्यावसायिक वाहनों की संख्या तीन फीसदी से भी कम रह गई है। विभाग द्वारा चलाए गए कड़े जांच अभियानों, निजी स्वचलित वाहन जांच केंद्रों (एटीएस) पर अनिवार्य मशीन-आधारित जांच, और पंजीकरण पर कार्रवाई करने की चेतावनियों के चलते यह सफलता मिली है।
परिवहन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में 12 लाख से अधिक वाहन पंजीकृत हैं। इनमें निजी और व्यावसायिक, दोनों तरह के वाहन शामिल हैं। इनमें व्यावसायिक वाहनों की संख्या एक लाख से अधिक है। व्यावसायिक वाहनों में टैक्सी, ऑटो, बस आदि व्यावसायिक वाहन शामिल हैं।
परिवहन विभाग के अनुसार इनमें बिना फिटनेस जांच वाहनों की संख्या तीन हजार से भी कम हो गई हैं। बिना फिटनेस जांच वाहनों की सूची में सबसे अधिक संख्या ऑटो और स्कूल बस की थी। इनके मालिकों ने वाहनों को दुरुस्त कराकर फिटनेस जांच प्रमाण पत्र हासिल कर लिया है।
एआरटीओ प्रशासन-प्रवर्तन नंदकुमार ने कहा बिना फिटनेस जांच दौड़ने वाले वाहनों के खिलाफ सख्ती से जांच अभियान चलाया गया है। इसका नतीजा वाहनों की फिटनेस जांच में वृद्धि के रूप में सामने आया है। जो वाहन बिना फिटनेस जांच बचे हैं, उनमें से ज्यादातर के मालिकों का कहना है कि गाड़ियों को वे सड़कों पर नहीं उतार रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी यदि यह वाहन सड़कों पर दौड़ते मिलेंगे तो जब्त कर लिए जाएंगे।
गौतमबुद्ध नगर में अब व्यावसायिक वाहनों की कर्मचारियों द्वारा फिटनेस जांच बंद कर दी गई है। कुछ ही तरह ऐसे वाहन हैं, जिनकी जांच परिवहन विभाग में होती है। बाकी वाहनों की जांच स्वचलित जांच केंद्रों (एटीएस) में मशीनों के जरिए की जानी अनिवार्य है।
जो वाहन तकनीकी रूप से अनफिट या खराब हैं और नियमों का पालन किए बिना सड़कों पर दौड़ रहे हैं, उन्हें परिवहन विभाग द्वारा जब्त करने का अभियान चलाया जा रहा है
वाहन मालिक अपने वाहन की फिटनेस वैधता परिवहन सेवा पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन जांच कर सकते हैं।
ब्रेक फेल होना, स्टीयरिंग जाम होना, या टायर फटने जैसी तकनीकी खराबियों के कारण ऐसी गाड़ियां बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं।
अनफिट और बिना परमिट वाले वाहनों को स्कूली वैन या बस के रूप में चलाया जाता है, जिससे मासूम बच्चों की जान खतरे में रहती है।
बिना फिटनेस वाले वाहन अत्यधिक जहरीला धुआं छोड़ते हैं, जिससे हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर तेजी से बढ़ता है, जो कि सेहत के लिए हानिकारक है।




