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GRAP Stage One: नोएडा में बढ़ते प्रदूषण के बीच ग्रेप-1 लागू, बुधवार को AQI 258 दर्ज

GRAP Stage One: नोएडा में बढ़ते प्रदूषण के बीच ग्रेप-1 लागू, बुधवार को AQI 258 दर्ज

नोएडा में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ने के मद्देनजर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) के पहले चरण को लागू कर दिया है। बुधवार शाम उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, नोएडा का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 258 दर्ज किया गया। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अन्य शहरों में भी प्रदूषण बढ़ने की स्थिति को देखते हुए आयोग ने बुधवार से पूरे एनसीआर में ग्रेप के पहले चरण के उपाय लागू करने के निर्देश दिए। इन उपायों का उद्देश्य प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण करना और हवा की गुणवत्ता को और खराब होने से रोकना है।

आयोग के अनुसार, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के पूर्वानुमानों में आने वाले दिनों में भी नोएडा और एनसीआर की हवा खराब श्रेणी में बने रहने की आशंका जताई गई है। इसके मद्देनजर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान समेत एनसीआर से संबंधित सभी एजेंसियों को ग्रेप-1 के तहत निर्धारित उपाय लागू करने, उनकी निगरानी करने और समय-समय पर स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। संबंधित विभागों से प्रदूषण नियंत्रण के लिए पहले से तय उपायों को तेज करने और वायु गुणवत्ता पर लगातार नजर रखने को कहा गया है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।

नोएडा के अलग-अलग निगरानी केंद्रों पर भी प्रदूषण का स्तर अलग-अलग दर्ज किया गया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, सेक्टर-62 में पीएम2.5 का स्तर 334, सेक्टर-116 में 239 और सेक्टर-1 में 245 दर्ज किया गया। ये आंकड़े अलग-अलग स्थानों पर प्रदूषण की स्थिति दर्शाते हैं। आयोग ने लोगों से भी ग्रेप के पहले चरण के तहत जारी नागरिक चार्टर का पालन करने की अपील की है। वायु गुणवत्ता और मौसम संबंधी पूर्वानुमानों के आधार पर हालात की समीक्षा लगातार की जाएगी। यदि प्रदूषण की स्थिति अधिक बिगड़ती है तो आगे के चरण लागू करने पर भी विचार किया जा सकता है।

ग्रेप-1 के तहत प्रदूषण कम करने के लिए कई प्रकार के उपायों पर जोर दिया गया है। होटल, रेस्तरां और खुले में खाने-पीने की दुकानों पर तंदूर में कोयले या लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक के निर्देश दिए जाते हैं और इसके स्थान पर गैस, बिजली या स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा दिया जाता है। सामान्य बिजली आपूर्ति के लिए डीजल जनरेटर के इस्तेमाल को नियंत्रित किया जाता है और उन्हें आपातकालीन या आवश्यक सेवाओं की स्थिति में ही चलाने की अनुमति होती है। सड़कों पर मशीनों के माध्यम से नियमित सफाई और धूल को नियंत्रित करने के लिए पानी का छिड़काव बढ़ाया जाता है। निर्माण तथा तोड़फोड़ वाले स्थलों पर धूल नियंत्रण से जुड़े नियमों का पालन करना और आवश्यकतानुसार एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल करना भी इन उपायों में शामिल है।

इसके अलावा, खुले में कूड़ा, प्लास्टिक और सूखे पत्ते जलाने पर रोक लगाने तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाते हैं। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों और वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) के बिना चल रहे वाहनों की जांच भी तेज की जाती है। आयोग ने संबंधित एजेंसियों को इन उपायों की निगरानी और नियमित समीक्षा करने को कहा है। बढ़ते प्रदूषण के बीच लोगों से अपील की गई है कि वे नियमों का पालन करें और वायु गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों में सहयोग दें। फिलहाल, नोएडा सहित पूरे एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए ग्रेप-1 के तहत निर्धारित उपाय लागू किए गए हैं और आगे की कार्रवाई हवा की गुणवत्ता तथा मौसम के पूर्वानुमान के आधार पर तय की जाएगी।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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