PM-Yashasvi scheme: पीएम-यशस्वी योजना की निगरानी तेज, छात्रवृत्ति कवरेज सुधारने पर केंद्र का जोर
नई दिल्ली, 10 अगस्त: महाराष्ट्र में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (ईबीसी) और विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू जनजाति (डीएनटी) वर्ग के विद्यार्थियों तक छात्रवृत्ति का लाभ बेहतर तरीके से पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने पीएम-यशस्वी योजना की निगरानी और सुधारात्मक कदम तेज कर दिए हैं। सरकार का फोकस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ पात्र विद्यार्थियों को समय पर छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने और कवरेज में मौजूद कमियों को दूर करने पर है।
योजना के क्रियान्वयन की प्रगति की नियमित समीक्षा की जा रही है। इसके लिए मासिक वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित करने के साथ क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर भी समीक्षा की जा रही है। इन बैठकों के माध्यम से राज्यों में योजना की स्थिति, विद्यार्थियों के आवेदन, संस्थानों की भूमिका, आवेदन के सत्यापन और छात्रवृत्ति वितरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की निगरानी की जा रही है।
सरकार के अनुसार, महाराष्ट्र को वर्ष 2025-26 से ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी विद्यार्थियों के लिए प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल से जोड़ा गया है। इससे विद्यार्थियों के आवेदन और छात्रवृत्ति प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में मदद मिल रही है।
प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत महाराष्ट्र के लिए वर्ष 2025-26 में 19.40 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। यह राशि वर्ष 2024-25 में जारी किए गए 5.56 करोड़ रुपये की तुलना में काफी अधिक है। सरकार का कहना है कि बढ़ी हुई राशि के जरिए अधिक पात्र विद्यार्थियों को योजना का लाभ उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है।
छात्रवृत्ति कवरेज को बढ़ाने के लिए सरकार ने जागरूकता अभियान पर भी जोर दिया है। पात्र विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को योजना की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ शैक्षणिक संस्थानों के साथ समन्वय मजबूत किया जा रहा है, ताकि आवेदन प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी न आए। इसके अलावा आवेदन और उनके प्रमाणीकरण की प्रक्रिया की नियमित निगरानी की जा रही है।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना के लिए पात्र कोई भी विद्यार्थी केवल जानकारी के अभाव, आवेदन प्रक्रिया में कमी या संस्थागत स्तर पर समन्वय की कमी के कारण छात्रवृत्ति के लाभ से वंचित न रहे। निगरानी व्यवस्था को मजबूत किए जाने से योजना के क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं की पहचान कर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिलेगी।
महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य में बड़ी संख्या में विद्यार्थी छात्रवृत्ति योजनाओं पर निर्भर हैं। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय आवंटन बढ़ाने के साथ-साथ योजना की निगरानी को प्राथमिकता देना छात्रवृत्ति कवरेज बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
