Noida Labor Protest: नोएडा श्रमिक आंदोलन मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, हिरासत में यातना के आरोप पर आरोपियों को कोर्ट में पेश करने का आदेश

Noida Labor Protest: नोएडा श्रमिक आंदोलन मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, हिरासत में यातना के आरोप पर आरोपियों को कोर्ट में पेश करने का आदेश
नोएडा, 15 मई : नोएडा में हाल ही में हुए श्रमिक आंदोलन के बाद गिरफ्तार किए गए लोगों के साथ पुलिस हिरासत में कथित प्रताड़ना का मामला अब Supreme Court of India पहुंच गया है। गिरफ्तार आदित्य आनंद और रूपेश रॉय के परिवारों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश पुलिस हिरासत में दोनों के साथ हिंसा और यातना की जा रही है। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाते हुए दोनों आरोपियों को अदालत के सामने पेश करने का आदेश दिया है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति B. V. Nagarathna और Ujjal Bhuyan की पीठ ने की। यह याचिका आदित्य आनंद के भाई केशव आनंद की ओर से दायर की गई थी। याचिका में कहा गया है कि श्रमिक आंदोलन को भड़काने के आरोप में गिरफ्तारी के बाद आदित्य को पुलिस हिरासत में प्रताड़ित किया गया और उनके साथ हिंसक व्यवहार किया गया।
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील ने हिरासत में यातना के आरोपों को खारिज कर दिया। हालांकि अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आदित्य आनंद और रूपेश रॉय को 18 मई को दोपहर 2 बजे अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है।
बताया जा रहा है कि पिछले महीने अप्रैल में नोएडा के कुछ औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों ने वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू किया था। देखते ही देखते यह आंदोलन उग्र हो गया और कुछ स्थानों पर हिंसा की घटनाएं सामने आईं। प्रदर्शन के दौरान संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, तोड़फोड़ करने, पुलिस पर पथराव करने और एक वाहन में आग लगाने के आरोप भी लगे थे।
पुलिस ने मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें आदित्य आनंद भी शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक आदित्य एक फैक्ट्री में इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं और साथ ही बच्चों के लिए एक पुस्तकालय भी चलाते हैं। अब हिरासत में प्रताड़ना के आरोपों के बाद यह मामला कानूनी और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस मामले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। अदालत में पेशी के दौरान हिरासत में आरोपियों की स्थिति और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर आगे की सुनवाई होने की संभावना है।
