Saturday, 24 October 2026निष्पक्ष खबरें • बेबाक नज़रिया
TOP STORY
THE COMPLETE NEWSROOMखबर पूरी। नज़रिया साफ़।भारत से आपके शहर तक
▤ ई-पेपर पढ़ें ↗
BREAKING NEWS
Ayodhya : योगी सरकार के मार्गदर्शन में अयोध्या में जगमगाएंगे 30 लाख से अधिक दीप, नया कीर्तिमान रचने की तैयारीAyodhya : दीपोत्सव-2026 से पहले निखरेगी रामनगरी की भव्यता, प्रमुख मार्गों के सौंदर्यीकरण में जुटा लोक निर्माण विभागLucknow : 26 अक्टूबर को धूमधाम से महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाएगी योगी सरकारMathura : वृंदावन में गंगा नृत्य नाटिका के साथ ब्रजरज उत्सव की सांस्कृतिक गतिविधियों का शुभारंभNew Delhi : दिल्ली क्वीन ब्यूटी पेजेंट 2026 का आयोजन, मुस्कान सेन बनीं विजेताChandigarh : दिल्ली एयरपोर्ट के अधिकारियों ने ऊपर से दबाव का हवाला देकर मुझे 2 घंटे तक रोककर रखा- मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मानChandigarh : वोट-चोरी’ लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा; एसआईआर को तुरंत रद्द किया जाए- मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मानTiger Shroff Firing Case: सलमान खान और रणबीर कपूर के घरों की रेकी का दावा, टाइगर पर फायरिंग के बाद बॉलीवुड की सुरक्षा बढ़ाने की मांग

Noida: किसानों के लीजबैक और शिफ्टिंग मामलों का होगा निपटारा, यमुना प्राधिकरण ने बनाई चार श्रेणियों वाली योजना

Noida: किसानों के लीजबैक और शिफ्टिंग मामलों का होगा निपटारा, यमुना प्राधिकरण ने बनाई चार श्रेणियों वाली योजना

नोएडा। लंबे समय से आंदोलन कर रहे किसानों के लिए राहत की खबर है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने किसानों की आबादी की जमीन लौटाने यानी लीजबैक और शिफ्टिंग से जुड़े मामलों के समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्राधिकरण ने इन लंबित मामलों को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर निपटाने की योजना तैयार की है। इसके तहत अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी को पूरे रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्राधिकरण के अनुसार नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में किसानों के लीजबैक और शिफ्टिंग से जुड़े कुल 367 से अधिक मामले लंबित हैं। इनमें 88 लीजबैक और 279 शिफ्टिंग के प्रकरण शामिल हैं। यह सभी जमीन वर्ष 2009-10 के दौरान प्राधिकरण क्षेत्र में शामिल की गई थीं। तब से लेकर अब तक बड़ी संख्या में किसान अपनी आबादी की जमीन वापसी के लिए भटक रहे हैं और कई बार आंदोलन भी कर चुके हैं।

यमुना प्राधिकरण ने बताया कि किसानों की आबादी की जमीन लौटाने को लेकर पहले भी सर्वे कराया गया था, लेकिन वर्ष 2012 में कराई गई सैटेलाइट मैपिंग में कई आबादी क्षेत्रों का कोई उल्लेख नहीं मिला। इसका कारण यह बताया गया कि मैपिंग से ठीक पहले कई गांवों में आबादी क्षेत्र का भौतिक अस्तित्व खत्म कर दिया गया था, जिससे उनका रिकॉर्ड डिजिटल दस्तावेजों में दर्ज नहीं हो पाया। इसके बाद प्राधिकरण ने वर्ष 2003-04 तक के पुराने नक्शों और रिकॉर्ड की दोबारा जांच कराई, ताकि यह साबित किया जा सके कि ये भूखंड वास्तव में आबादी क्षेत्र का हिस्सा थे और उनका अधिग्रहण गलत तरीके से हुआ था। हालांकि जांच के दौरान हर मामले में अलग-अलग तरह के विवाद सामने आए, जिससे निस्तारण की प्रक्रिया जटिल होती चली गई।

बुधवार को किसान नेता पवन खटाना के नेतृत्व में बल्लूखेडा समेत कई गांवों के किसान लीजबैक और शिफ्टिंग के प्रकरण लेकर प्राधिकरण कार्यालय पहुंचे। किसानों ने अधिकारियों के सामने अपनी आपबीती सुनाई और बताया कि विभिन्न परियोजनाओं के लिए उनकी जमीन अधिग्रहीत कर ली गई, लेकिन पैसा जमा करने के बावजूद उन्हें अब तक आबादी की जमीन नहीं दी गई। किसानों ने 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे की मांग भी रखी। एक किसान ने बताया कि वर्ष 2011 में उसकी 45 बीघा जमीन अधिग्रहित कर ली गई थी, लेकिन न तो पूरा मुआवजा मिला और न ही आबादी की जमीन लौटाई गई।

किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्राधिकरण ने एसीईओ राजेश कुमार को पूरा रिकॉर्ड तैयार करने और मामलों को श्रेणियों में बांटने के निर्देश दिए हैं। प्राधिकरण की योजना के अनुसार पहली श्रेणी में वे किसान रखे जाएंगे जिन्होंने मुआवजा नहीं लिया है और केवल अपनी आबादी की जमीन पर ही कब्जा किया हुआ है, ऐसे मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाएगा। दूसरी श्रेणी में वे किसान होंगे जिन्होंने मुआवजा तो ले लिया है, लेकिन अतिरिक्त जमीन पर कब्जा कर ज्यादा मांग कर रहे हैं, इन मामलों को आपसी वार्ता से सुलझाने की कोशिश होगी। तीसरी श्रेणी में वे किसान शामिल होंगे जिन्होंने मुआवजा लेने के बाद भी जमीन पर कब्जा किया हुआ है, ऐसे मामलों में यह तय किया जाएगा कि उनसे ब्याज सहित पैसा लिया जाए या नहीं। चौथी श्रेणी में वे जटिल मामले आएंगे, जिनमें किसानों ने ज्यादा मुआवजा लिया है, ज्यादा भूमि पर कब्जा किया है और अब भी तीन गुना मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

यमुना प्राधिकरण के सीईओ आरके सिंह ने स्पष्ट किया कि किसानों के मामलों को चार श्रेणियों में बांटकर ही समाधान संभव है। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड तैयार करने की जिम्मेदारी एसीईओ को दी गई है और श्रेणी के आधार पर ही वास्तविक हकदार किसानों को राहत दी जाएगी। प्राधिकरण का दावा है कि इस प्रक्रिया के बाद वर्षों से लंबित लीजबैक और शिफ्टिंग मामलों में ठोस समाधान निकल सकेगा और किसानों को उनकी आबादी की जमीन वापस मिल सकेगी।

इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया

Avatar photo
संवाददाता

Tirthankar Sarkar

संबंधित खबरें