Demolition Team Protest: अवैध निर्माण गिराने गई टीम विरोध के चलते वापस लौटी
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के बिसरख गांव में अवैध निर्माण हटाने पहुंची प्राधिकरण और पुलिस की टीम को स्थानीय विरोध का सामना करना पड़ा, जिसके बाद टीम को वापस लौटना पड़ा। कार्रवाई खसरा संख्या 334 से जुड़े निर्माण पर की जानी थी। मौके पर विरोध होने से कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। घटना के बाद निर्माण की स्थिति, पहले जारी किए गए नोटिस और मौके पर हुए विरोध से संबंधित पहलुओं की जांच की जा रही है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संबंधित निर्माण को लेकर पहले नोटिस जारी किया गया था। कार्रवाई के आधार में धारा 10 के तहत दी गई प्रक्रिया और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों का उल्लेख किया गया है। इन दस्तावेजों और निर्देशों के आधार पर प्राधिकरण की टीम निर्माण हटाने के लिए पहुंची थी। हालांकि, मौके पर कार्रवाई का विरोध होने से टीम को लौटना पड़ा। आगे की कार्रवाई किस तरह होगी, यह प्रशासनिक प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
मामले में कुलदीप भाटी का नाम भी सामने आया है। घटनास्थल पर किस तरह विरोध हुआ और कौन-कौन लोग उसमें शामिल थे, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। किसी व्यक्ति की भूमिका या जिम्मेदारी का निर्धारण जांच और संबंधित साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकता है। प्राधिकरण के नोटिस, निर्माण से जुड़े दस्तावेज और मौके की परिस्थितियों का मिलान इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।
अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई में प्रशासनिक आदेशों के साथ मौके पर कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी होता है। इस मामले में टीम के लौटने के बाद यह प्रश्न उठता है कि आगे कार्रवाई के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी और विरोध की घटना को लेकर क्या कानूनी कदम उठाए जाएंगे। उपलब्ध सूचना में एफआईआर और जांच का उल्लेख है, लेकिन जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं।
फिलहाल बिसरख गांव के खसरा संख्या 334 से जुड़े निर्माण और कार्रवाई के दौरान हुए विरोध की जांच की जा रही है। संबंधित नोटिस, एनजीटी के निर्देश, निर्माण की स्थिति और लोगों की भूमिका को सामने रखकर आगे का निर्णय लिया जाएगा। टीम का वापस लौटना इस बात को दर्शाता है कि उस समय कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी; आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई जांच तथा संबंधित अधिकारियों के निर्णय पर निर्भर करेगी।




