रोजगार ढांचे को मजबूत करने पर NFPRC की कार्यशाला, 40 सांसदों-विधायकों ने लिया हिस्सा
नई दिल्ली, 29 सितंबर। भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के तहत रोजगार के अवसरों को बढ़ाने और देश के रोजगार ढांचे को मजबूत करने पर चर्चा के लिए Nation First Policy Research and Change Foundation (NFPRC) ने सांसदों और विधायकों के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया। इंडिया हैबिटेट सेंटर के गुलमोहर हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में लोकसभा, राज्यसभा और विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के करीब 40 जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला में शिक्षा और कौशल विकास को उद्योग की जरूरतों से जोड़ने, निवेश एवं औद्योगिकीकरण के जरिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने और निर्वाचन क्षेत्रों में डिजिटल माध्यमों से प्रभावी संवाद स्थापित करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में नीति विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों ने स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उपायों पर विचार साझा किए।
NFPRC फाउंडेशन के बोर्ड सदस्य अभिनव प्रकाश ने कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति को प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक अवसरों में बदलने की जरूरत है। उन्होंने शिक्षा, कौशल और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल के साथ स्थानीय जरूरतों के अनुरूप निवेश और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने स्थानीय युवाओं के कौशल, क्षमताओं और आकांक्षाओं को क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार अवसरों से जोड़ने की आवश्यकता बताई। उन्होंने सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच साझेदारी बढ़ाने तथा स्थानीय प्रतिभाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में विधायकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

लोकसभा सांसद शशांक मणि ने टियर-2 और टियर-3 जिलों में स्थानीय उद्यमिता को रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के देवरिया और आसपास के क्षेत्रों में चलाए जा रहे ‘अमृत प्रयास’ और ‘जागृति’ मॉडल का उल्लेख करते हुए स्थानीय स्तर पर विनिर्माण, कृषि प्रसंस्करण और पर्यटन के जरिए रोजगार बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की।
Foundation for Economic Development के निदेशक राहुल अहलूवालिया ने निर्यात आधारित विकास, प्रतिस्पर्धी विनिर्माण क्लस्टर, वैश्विक निवेश और कारोबारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने को रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं की पहचान कर निवेशकों और उद्योगों को सुविधा प्रदान करने में भूमिका निभा सकते हैं।
संचार विशेषज्ञ डॉ. रोहित उपाध्याय ने जनप्रतिनिधियों के लिए डिजिटल और सोशल मीडिया संचार पर क्षमता निर्माण सत्र आयोजित किया। इसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, नागरिक संवाद, डिजिटल कंटेंट, एनालिटिक्स, गलत सूचना से निपटने और सार्वजनिक संचार में एआई के जिम्मेदार इस्तेमाल पर जानकारी दी गई।
कार्यशाला के समापन पर वासुदेव देवनानी ने वक्ताओं और जनप्रतिनिधियों के योगदान की सराहना की। NFPRC ने कहा कि वह आगे भी नीति संवाद, विषय आधारित विचार-विमर्श और शोध आधारित पहलों के माध्यम से विधायी क्षमता और साक्ष्य आधारित नीति निर्माण को मजबूत करने के लिए काम करता रहेगा।अगर आप चाहें तो इसे मैं वेब पोर्टल की ज्यादा आकर्षक शैली में SEO हेडलाइन, सबहेड और 2-3 छोटे बॉक्स/हाइलाइट्स के साथ भी तैयार कर सकता हूं।


