Yuvraj Mehta Death Case: युवराज मौत मामला: बचाव दल ने लापरवाही दिखाई, मेरे बेटे को भगवान भरोसे छोड़ दिया, पिता का छलका दर्द
नोएडा। सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद आयोजित शोक सभा के दौरान उनके पिता राजकुमार मेहता का दर्द छलक उठा। नम आंखों से उन्होंने कहा कि जलजमाव वाले गड्ढे में गिरने के बाद उनके बेटे ने लगभग दो घंटे तक संघर्ष किया और बचाव के लिए पर्याप्त समय और मौका दिया, लेकिन बचाव दल की गंभीर लापरवाही के कारण युवराज को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सही ढंग से प्रयास किए जाते, तो उनके बेटे की जान आसानी से बचाई जा सकती थी।
राजकुमार मेहता ने भावुक होते हुए कहा कि वह जानते हैं कि युवराज को अब कभी वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन उनकी यह लड़ाई न्याय के लिए है ताकि भविष्य में कोई दूसरा युवराज ऐसी त्रासदी का शिकार न बने। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में जिन विभागों और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है, उनके खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बेटे की मौत के बाद वह और उनका परिवार पूरी तरह टूट चुके थे और हताश हो गए थे, लेकिन समाज के लोगों, मीडिया और आम नागरिकों ने जिस तरह इस घटना के खिलाफ आवाज बुलंद की, उससे उन्हें हिम्मत मिली। उन्होंने उन सभी लोगों का धन्यवाद किया जिन्होंने इस मामले को सही दिशा दी और लापरवाह विभागों तथा गैर-जिम्मेदार कर्मचारियों को सजा दिलाने की मांग को मजबूती से आगे बढ़ाया।
युवराज के पिता ने डिलीवरी बॉय मोनिंदर का भी विशेष रूप से आभार व्यक्त किया, जिसने बिना अपनी जान की परवाह किए नाले में छलांग लगाकर युवराज को ढूंढने और बचाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि उनका बेटा बहुत साहसी था और अंत तक उसने हार नहीं मानी।
राजकुमार मेहता ने उत्तर प्रदेश सरकार का भी धन्यवाद किया कि उन्होंने इस दर्दनाक घटना का संज्ञान लेते हुए एसआईटी का गठन किया। उन्होंने कहा कि उनकी एक ही मांग है कि किसी भी हालत में दोषियों को बख्शा न जाए और उन्हें सख्त सजा मिले। अंत में उन्होंने देश की जनता, मीडिया, सोसाइटी के सभी निवासियों और स्थानीय प्रशासन का न्याय की इस लड़ाई में साथ देने के लिए आभार व्यक्त किया।
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