Yuvraj Death Case: जांच पूरी, SIT तीन दिन में मुख्यमंत्री को सौंपेगी अंतिम रिपोर्ट

Yuvraj Death Case: जांच पूरी, SIT तीन दिन में मुख्यमंत्री को सौंपेगी अंतिम रिपोर्ट

नोएडा में युवराज मेहता की मौत से जुड़े मामले की जांच अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फैसला जल्द होने के संकेत हैं। रविवार दोपहर 12 बजे नोएडा प्राधिकरण, पुलिस और जिला प्रशासन की ओर से अपने-अपने अंतिम तर्क रखे गए। करीब दो दिनों तक चले गहन सवाल-जवाब और लगभग 600 पन्नों के विस्तृत जवाबों के बाद अब विशेष जांच टीम यानी एसआईटी दो से तीन दिनों के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपने की तैयारी में है। यह रिपोर्ट केवल घटनाक्रम का विवरण भर नहीं होगी, बल्कि इसमें यह स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाएगा कि किस स्तर पर चूक हुई और किन अधिकारियों ने फैसले लेने में लापरवाही बरती।

सूत्रों के अनुसार एसआईटी की रिपोर्ट मुख्यमंत्री के लिए सीधे तौर पर कार्रवाई का आधार बनेगी। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों से यह संकेत मिल रहे हैं कि इस पूरे मामले में प्रशासनिक ढिलाई और सिस्टम फेलियर को हल्के में नहीं लिया जाएगा। युवराज की मौत के बाद जिस तरह से सवाल उठे और जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज हुई, उसने इस प्रकरण को महज एक जांच से आगे बढ़ाकर सरकार की जवाबदेही से जोड़ दिया है। अब फैसला इस बात का होगा कि सरकार ऐसे मामलों में कितनी सख्ती दिखाती है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।

जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि एसआईटी रिपोर्ट में सिर्फ फील्ड स्तर के कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं रहा गया है, बल्कि निर्णय लेने वाली पूरी चेन ऑफ कमांड का आकलन किया गया है। किस अधिकारी के पास किस स्तर पर कौन-सी जिम्मेदारी थी, किस समय कौन-सा फैसला लिया गया या किन कारणों से टाल दिया गया, इन सभी पहलुओं को तथ्यों और दस्तावेजों के साथ मुख्यमंत्री के सामने रखा जाएगा। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कार्रवाई केवल प्रतीकात्मक रहेगी या फिर संरचनात्मक बदलाव और सख्त दंडात्मक कदम भी उठाए जाएंगे।

हालांकि रविवार को एसआईटी की टीम नोएडा नहीं पहुंची, लेकिन इससे यह नहीं माना जा रहा कि जांच की रफ्तार धीमी पड़ी है। टीम फिलहाल अंतिम मंथन में जुटी हुई है और सभी विभागों से मिले जवाबों का आपसी मिलान किया जा रहा है। जहां-जहां जवाबों में विरोधाभास सामने आ रहा है, उन्हें रिपोर्ट में अलग से चिह्नित किया जा रहा है ताकि मुख्यमंत्री को पूरे मामले की साफ और निष्पक्ष तस्वीर मिल सके।

मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद ही यह तय होगा कि कार्रवाई की सीमा क्या होगी। यह भी संभव है कि कार्रवाई केवल विभागीय नोटिस, चेतावनी या तबादलों तक सीमित न रहकर निलंबन और अन्य सख्त दंडात्मक कदमों तक पहुंचे। सूत्रों का कहना है कि जिन अधिकारियों की भूमिका गंभीर लापरवाही के दायरे में पाई गई है, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की सिफारिश रिपोर्ट में शामिल की जा सकती है। युवराज की मौत के मामले में अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री के फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि यह मामला फाइलों तक सिमटता है या जिम्मेदारी तय होकर ठोस कार्रवाई तक पहुंचता है।

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