Farmer Protest: यमुना प्राधिकरण कार्यालय जा रहे 100 से अधिक किसान हिरासत में, भूमि मुआवजे और आबादी भूखंड की मांग पर प्रदर्शन
ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) कार्यालय पर अपनी मांगों को लेकर धरना देने जा रहे किसानों और पुलिस के बीच बुधवार को नोकझोंक हुई। किसानों का आरोप है कि पुलिस ने उनकी पदयात्रा को बीच में ही रोक दिया और 100 से अधिक किसानों को जबरन बसों में बैठाकर हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए लोगों में महिलाएं भी शामिल थीं। किसानों के मुताबिक, कुछ लोगों को गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) सहित अलग-अलग स्थानों पर रखा गया। किसान नेताओं ने पुलिस और प्राधिकरण के अधिकारियों पर उनकी आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई का विरोध किया। किसानों की प्रमुख मांगों में 10 प्रतिशत आबादी भूखंड, नया भूमि अधिग्रहण कानून लागू करने और जमीन की लीजबैक तथा शिफ्टिंग से जुड़े मामलों का समाधान शामिल है।
किसान नेता डॉ. रुपेश वर्मा और सुखबीर खलीफा ने बुधवार को प्रदर्शन का ऐलान किया था। इसके तहत किसान सेक्टर-पी-3 स्थित बारातघर से यमुना प्राधिकरण कार्यालय तक पदयात्रा निकालना चाहते थे। हालांकि, पुलिस ने रास्ते में ही किसानों को रोक दिया। किसानों का आरोप है कि आंदोलन में शामिल होने से रोकने के लिए पुलिस कुछ लोगों के घर भी पहुंची और उन्हें घरों में नजरबंद कर दिया। इसके बावजूद किसी तरह यमुना प्राधिकरण कार्यालय तक पहुंचने वाले 100 से अधिक किसानों, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, को पुलिस ने बसों में बैठाकर हिरासत में ले लिया। किसानों का कहना है कि उन्हें जीबीयू और अन्य स्थानों पर रखा गया। इस कार्रवाई के बाद आंदोलन में शामिल लोगों ने नाराजगी जाहिर की और इसे अपनी आवाज दबाने का प्रयास बताया। किसान सभा के आंदोलन में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की तैयारी थी।
किसान नेता डॉ. रुपेश वर्मा ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण पदयात्रा को रोककर किसानों की समस्याओं को उठाने से रोका जा रहा है। किसान संघर्ष से जुड़े नेता सोरन प्रधान ने भी कार्रवाई को गलत बताते हुए कहा कि अपनी जायज मांगों को लेकर आंदोलन करने वाले किसानों को घरों में नजरबंद करना और हिरासत में लेना उचित नहीं है। एडवोकेट उमेश भाटी ने कहा कि 25 वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी किसानों को उनका हक नहीं मिला है। किसानों की मांग है कि उन्हें 10 प्रतिशत आबादी भूखंड दिए जाएं, नया भूमि अधिग्रहण कानून लागू किया जाए और जमीन से जुड़े लीजबैक के मामलों का निस्तारण किया जाए। किसान नेताओं का कहना है कि लंबे समय से आंदोलन करने के बावजूद इन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
प्रदर्शन को देखते हुए शहर के विभिन्न गोलचक्करों और प्रमुख मार्गों पर पुलिस बल तैनात किया गया था। किसानों को यीडा कार्यालय तक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस अलग-अलग स्थानों पर निगरानी कर रही थी। किसानों के अलग-अलग रास्तों से आने की जानकारी मिलने पर उन्हें रोका गया, हिरासत में लिया गया या वापस भेजा गया। इस दौरान कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच नोकझोंक हुई, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ। दिनभर शहर के कई मार्गों पर जाम जैसी स्थिति बनी रही। पुलिस की तैनाती के कारण किसानों की पदयात्रा आगे नहीं बढ़ सकी और प्रदर्शन को लेकर तनाव की स्थिति बनी रही।
यीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी आरके सिंह ने कहा कि किसानों की प्रमुख मांगों पर प्राधिकरण स्तर पर काम किया जा रहा है और ऐसे में धरना देने का कोई औचित्य नहीं है। उनके अनुसार, 30 गांवों में लीजबैक के 228 मामले लंबित हैं। शिफ्टिंग से जुड़े 88 मामलों में से 52 बाहरी बताए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 64 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे की पूरी राशि का भुगतान किया जा चुका है। उनके मुताबिक, जिन मामलों में पैसा शेष है, वे अदालत से जुड़े प्रकरणों या जमीन का कब्जा नहीं छोड़ने जैसी परिस्थितियों से संबंधित हैं। आरके सिंह ने बताया कि किसानों की दूसरी मांगों पर भी प्राधिकरण स्तर पर काम किया जा रहा है और उन्होंने किसानों से शांति बनाए रखने की अपील की है। वहीं, किसान नेताओं की मांग है कि लंबित मामलों का समयबद्ध और ठोस समाधान किया जाए।




