Yamuna Pollution Control: यमुना का प्रदूषण घटाने के लिए 24 एसटीपी लगाने की योजना
नोएडा। यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने एक्शन प्लान पर काम तेज कर दिया है। शहर के नालों से यमुना में पहुंचने वाले पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए 24 एसटीपी और तीन फाइको-फाइको ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे। योजना के तहत एक ड्रेन पर तीन एसटीपी लगाने की व्यवस्था की जा रही है। आईआईटी दिल्ली और नीरी की रिपोर्ट आ गई है। अब इस योजना को लेकर चार नवंबर को बैठक होगी।
नई व्यवस्था के तहत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ऑनलाइन ही नालों के शुरुआती और अंतिम हिस्से में प्रदूषण का स्तर देख सकता है। इससे पानी की गुणवत्ता में सुधार की निगरानी करना आसान होगा। नोएडा में करीब 17 किलोमीटर क्षेत्र में यमुना बहती है। शहर के छोटे-बड़े नालों का पानी मुख्य कोंडली नाले के जरिये यमुना में पहुंचता है। प्राधिकरण के मुताबिक, नालों में पहले से एसटीपी से शोधित पानी छोड़ा जा रहा है। इसके बावजूद पानी की गुणवत्ता और बेहतर करने के लिए नालों पर अतिरिक्त ट्रीटमेंट की व्यवस्था की जा रही है।
जीएम आरपी सिंह ने बताया कि योजना के तहत 24 एसटीपी लगाए जाने हैं। इनमें से आठ एसटीपी के लिए काम शुरू हो चुका है। इसके अलावा तीन फाइको-फाइको ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाए जाएंगे। इनका उद्देश्य नालों के पानी में प्रदूषण की मात्रा कम करना है। खासतौर पर पानी में सीओडी और बीओडी का स्तर घटाने पर जोर दिया जा रहा है।
प्राधिकरण के मुताबिक, प्रस्तावित 13 एसटीपी में से पांच की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो चुकी है। इनकी तकनीकी जांच आईआईटी दिल्ली से कराई जा रही थी। अब आईआईटी दिल्ली और नीरी की रिपोर्ट प्राप्त हो गई है। इस संबंध में चार नवंबर को होने वाली बैठक में आगे की कार्ययोजना पर चर्चा की जाएगी।।योजना के अनुसार, पांच एसटीपी को दिसंबर 2027 तक लगाने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि बाकी आठ एसटीपी दिसंबर 2028 तक तैयार किए जाने हैं। सभी प्लांट शुरू होने के बाद नालों के पानी की गुणवत्ता में सुधार और यमुना में प्रदूषण का दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
योजना में नालों के पानी की गुणवत्ता की निगरानी पर भी जोर दिया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत सीपीसीबी ऑनलाइन माध्यम से किसी नाले के शुरुआती और अंतिम हिस्से में प्रदूषण का स्तर देख सकेगा।
इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि नाले में पानी की गुणवत्ता कहां और कितनी खराब हो रही है। साथ ही, ट्रीटमेंट के बाद प्रदूषण के स्तर में आए बदलाव की निगरानी भी की जा सकेगी।




