Vande Mataram: पश्चिम बंगाल के मदरसों में वंदे मातरम गायन अनिवार्य, सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कही बात
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार, 26 सितंबर 2026 को कहा कि राज्य सरकार ने स्कूलों के साथ पंजीकृत मदरसों में भी ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य कर दिया है। उन्होंने यह बात कोलकाता स्थित नेशनल लाइब्रेरी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही। मुख्यमंत्री के मुताबिक यह व्यवस्था राज्य के स्कूलों और पंजीकृत मदरसों में लागू होगी।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षण संस्थानों में ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर निर्णय लिया है। उनके बयान के मुताबिक पंजीकृत मदरसों में भी सुबह की सभा के दौरान इसका गायन किया जाना होगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रीय गीत से जुड़ी व्यवस्था को लेकर पहले ही आदेश जारी किए जा चुके हैं।
पश्चिम बंगाल में मदरसों को लेकर सरकार की ओर से पहले भी इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी किया गया था। मई 2026 में राज्य के अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के तहत आने वाले मान्यता प्राप्त, सरकारी सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त मदरसों की सुबह की सभा में ‘वंदे मातरम’ के गायन को अनिवार्य किए जाने की सूचना सामने आई थी।
उस समय जारी व्यवस्था के अनुसार राज्य के विभिन्न श्रेणियों के मान्यता प्राप्त मदरसों में कक्षाएं शुरू होने से पहले आयोजित प्रार्थना या असेंबली के दौरान ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य किया गया था। यह आदेश राज्य के मदरसा शिक्षा तंत्र के अंतर्गत आने वाले संस्थानों पर लागू होने की जानकारी दी गई थी।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार के कार्यक्रम में इसी व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे राज्य के पंजीकृत मदरसों में लागू किया गया है। उनके बयान के बाद इस विषय को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा फिर तेज हो गई है। इससे पहले भी इस फैसले पर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।
मई 2026 में आदेश सामने आने के बाद विपक्षी दलों और कुछ मुस्लिम संगठनों ने इसका विरोध किया था। उनके प्रतिनिधियों ने तर्क दिया था कि अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में किसी गीत का गायन अनिवार्य करना उचित नहीं है। वहीं भाजपा नेताओं की ओर से इसे राष्ट्रीय गीत के सम्मान और राष्ट्र से जुड़ी भावना के संदर्भ में उचित ठहराया गया था। ये प्रतिक्रियाएं संबंधित पक्षों के सार्वजनिक बयानों पर आधारित थीं।
इस मुद्दे के कानूनी पहलू पर भी हाल के महीनों में बहस हुई है। राष्ट्रीय स्तर पर ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर अलग-अलग निर्देशों और न्यायिक विचार-विमर्श का विषय सामने आया है। सितंबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष ऐसे कानूनी सवालों पर भी सुनवाई की खबर आई, जिनमें गीत नहीं गाने को दंडनीय बनाने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े पहलुओं पर विचार शामिल है।
पश्चिम बंगाल सरकार के मौजूदा फैसले के दायरे में राज्य के पंजीकृत मदरसे आते हैं। राज्य में सैकड़ों मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित होने की जानकारी सामने आई है, जिनमें अलग-अलग स्तर की शिक्षा व्यवस्था शामिल है। सरकार की ओर से लागू किए गए नियमों को लेकर संस्थानों में इसके पालन की प्रक्रिया और प्रशासनिक निगरानी भी महत्वपूर्ण विषय बनी हुई है।
मुख्यमंत्री के ताजा बयान के बाद अब राज्य में यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। सरकार की ओर से इसे शैक्षणिक संस्थानों में लागू व्यवस्था के तौर पर पेश किया गया है, जबकि विरोध करने वाले पक्ष इसके अनिवार्य स्वरूप पर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में इस मुद्दे को लेकर प्रशासनिक स्तर पर अनुपालन और कानूनी स्थिति पर नजर बनी रहेगी।
फिलहाल पश्चिम बंगाल में पंजीकृत मदरसों में ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का बयान सामने आया है और यह मामला राज्य की शिक्षा व्यवस्था तथा सार्वजनिक नीति से जुड़े विमर्श का हिस्सा बना हुआ है। सरकार के आदेशों, संस्थानों के अनुपालन और इस विषय पर आगे आने वाली कानूनी या राजनीतिक प्रतिक्रियाओं से मामले की अगली तस्वीर स्पष्ट होगी।


