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उत्तर प्रदेश, नोएडा: चीनी से बन रहे गिलास, दोने,पत्तल और कटोरियां

उत्तर प्रदेश, नोएडा: चीनी से बन रहे गिलास, दोने,पत्तल और कटोरियां
चीनी का इस्तेमाल अब केवल सुबह की चाय में ही नहीं होगा बल्कि आप जल्द अब चीनी से बने गिलास में चाय भी पी पाएंगे

अजीत कुमार
उत्तर प्रदेश, नोएडा। चीनी का इस्तेमाल अब केवल सुबह की चाय में ही नहीं होगा बल्कि आप जल्द अब चीनी से बने गिलास में चाय भी पी पाएंगे। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में चीनी के दानों से बने उत्पाद बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड की ओर से पेश किए गए हैं। इन उत्पादों को देखने के लिए लोग अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे हैं। अब तक इन उत्पादों का निर्माण महाराष्ट्र में हो रहा था। सितंबर 2026 से चीनी से बनी गिलास, कटोरियां और दोने प्रदेश में भी उपलब्ध होंगे। इसके प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।

कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि चीनी को रासायनिक प्रकिया से बदलकर पीएलए(पॉलीलैक्टिक एसिड) में परिवर्तित किया जा रहा है। जिससे उत्पाद तैयार हो रहे हैं। बलरामपुर चीनी मिल शक्कर के गन्ने से बायोप्लास्टिक (पीएलए) बनाने के लिए बायोयुग नामक एक नई तकनीक पर काम कर रही है, जिससे जीवाश्म-ईंधन वाले प्लास्टिक के लिए 100 प्रतिशत कम्पोस्टेबल और पौधे-आधारित विकल्प तैयार हो सकें। बायोयुग, बायो सर्कुलेरिटी के युग का प्रतीक है, जो भारत के बायो-आधारित, कम कार्बन अर्थव्यवस्था में परिवर्तन की दिशा में एक कदम है। बलरामपुर चीनी मिल्स अपनी चीनी उत्पादन की 9 फीसदी चीनी से पीएलए तैयार करेगी।

दरअसल प्लास्टिक उत्पादों से सबसे ज्यादा नुकसान दिल्ली एनसीआर के शहरों को हो रहा है और यह एक बड़ा बाजार है इसलिए बायोप्लास्टिक से उत्पाद तैयार करने वाले स्टार्टअप को भी साथ लेने की रणनीति तैयार की है। जो लोग बायोप्लास्टिक पर काम कर रहे हैं उन्हें कच्चा माल बलरामपुर चीनी मिल्स उपलब्ध कराने का प्रयास करेगी।

कार्बन फुट प्रिंट को कम करने का प्रयास

पीएलए के माध्यम से कार्बन फुट प्रिंट को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। पॉलीलैक्टिक एसिड एक तरह का बायोप्लास्टिक होता है, जो शक्कर या स्टार्च जैसी जैविक चीजों से बनाया जाता है। यह प्लास्टिक पर्यावरण के लिए हानिकारक नहीं होता और कुछ ही महीनों में अपने आप गल जाता है। पीएलए की मदद से न केवल गिलास,कटोरी,चम्मच बनाएं जा रहे हैं,बल्कि कमीज,शार्ट,पेंट के साथ अन्य उत्पाद भी बनाए जा रहे हैं। पीएलए से बने कपड़े बनाने के लिए रेशम,कॉटन आदि का भी उपयोग किया जाता है।

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