Twisha Sharma Death Case: ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह की जमानत अर्जी खारिज
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़े मामले में पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी है। जबलपुर की एकलपीठ ने जांच में सामने आए डिजिटल साक्ष्यों, मामले की परिस्थितियों और लंबित फोरेंसिक रिपोर्टों को देखते हुए इस चरण पर राहत देने से इनकार किया। न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी ने 26 अक्टूबर को सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित रखा था, जो 4 नवंबर को सार्वजनिक हुआ।
भोपाल में 33 वर्षीय पूर्व मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा 12 मई 2026 को अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया। जांच के शुरुआती चरण में आत्महत्या की बात सामने आई, जबकि मायके पक्ष ने मानसिक प्रताड़ना और दहेज संबंधी मांगों के आरोप लगाए। बाद में जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दी गई।
ट्विशा की शादी 9 दिसंबर 2025 को अधिवक्ता समर्थ सिंह से हुई थी। अभियोजन का यह आरोप लगाया गया है कि विवाह के बाद उन पर मानसिक दबाव बनाया गया और पेशेवर जीवन को लेकर विवाद होते थे। अप्रैल में गर्भावस्था समाप्त होने के बाद पारिवारिक तनाव बढ़ने तथा करीब 20 लाख रुपये के इक्विटी निवेश को संयुक्त खाते में डालने के दबाव के आरोप भी जांच में सामने आए हैं। इन आरोपों का अंतिम न्यायिक परीक्षण बाकी है।
पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह पर बहू को प्रताड़ित करने और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप हैं। सीबीआई ने व्हाट्सऐप संदेश, डिजिटल ट्रांसक्रिप्ट और घर के सीसीटीवी रिकॉर्ड को जांच का हिस्सा बनाया है। अदालत ने मौत से पहले हुई बातचीत और घटनाक्रम के आसपास की परिस्थितियों पर विचार किया।
सुनवाई के दौरान बताया गया कि ट्विशा के आईफोन से डेटा निकालने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। घर के डीवीआर से मिली फुटेज की प्रामाणिकता और निरंतरता की जांच के लिए उसे नई दिल्ली स्थित केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट का इंतजार है।
अभियोजन ने वारदात के बाद प्रभावशाली व्यक्तियों से कथित संपर्क की परिस्थितियों की जांच की जरूरत भी बताई। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आत्महत्या के लिए उकसाने के आपराधिक इरादे का पर्याप्त आधार नहीं है और संदेशों में मुख्य शिकायतें उनके बेटे से संबंधित थीं। बचाव ने मेडिकल रिकॉर्ड और परिवार की ओर से 7.5 लाख रुपये के हस्तांतरण का भी हवाला दिया।
सीबीआई, राज्य सरकार और पीड़ित परिवार ने जमानत का विरोध किया। अदालत ने कहा कि जांच के मौजूदा चरण में उपलब्ध परिस्थितियों को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता और महत्वपूर्ण डिजिटल रिपोर्टें अभी लंबित हैं। गिरिबाला सिंह 2 जून 2026 से हिरासत में हैं। पूर्व में विशेष सीबीआई अदालत ने भी नियमित जमानत नहीं दी थी।
मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में फंदे से लटकने के कारण दम घुटने की बात कही गई है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत आदेश में की गई टिप्पणियां मुकदमे के अंतिम निष्कर्ष को प्रभावित नहीं करेंगी। आरोपों और जिम्मेदारी का निर्धारण ट्रायल में साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए होगा।
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