Technology Innovation: भविष्य की तकनीकों के निर्माण में दुनिया का नेतृत्व करे भारत, पीएम मोदी ने युवाओं के कौशल और आत्मविश्वास को सराहा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार के दिन नई दिल्ली में आयोजित इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए यह बात कही कि भारत अब विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सिर्फ दूसरे देशों की तकनीकों को अपनाने तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि 21वीं सदी के भारत का मुख्य लक्ष्य भविष्य की अत्याधुनिक तकनीकों का स्वदेशी निर्माण करना, नवाचार को गति देना और वैश्विक चुनौतियों के समाधान विकसित करना है। भारतीय युवाओं के तकनीकी कौशल, उनकी मौलिक सोच और निरंतर बढ़ते आत्मविश्वास की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने यह बात कही कि देश के पास ऐसी अभूतपूर्व क्षमताएं मौजूद हैं जो भारत को वैश्विक पटल पर तकनीकी नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित कर सकती हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में अतीत और वर्तमान के फर्क को रेखांकित करते हुए यह बात कही कि पहले विकसित देशों में खोजी गई तकनीकों को भारत पहुंचने में दशकों लग जाते थे और उस समय देश की प्राथमिकता विदेशी तकनीकों को अपनाने या उनमें आंशिक सुधार करने तक सीमित रहती थी। लेकिन आज का भारत अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा और आत्मनिर्भरता के बल पर आगे बढ़ रहा है। अब देश का विजन ऐसी तकनीकों का विकास करना है जो न सिर्फ देश की घरेलू जरूरीताओं की पूर्ति करें, बल्कि वैश्विक समस्याओं के समाधान में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं। उन्होंने जोर दिया कि भारत को सिर्फ भागीदार नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकों की दिशा तय करने वाला अहम केंद्र बनना होगा।
अंतरिक्ष और स्वास्थ्य क्षेत्र में देश की ऐतिहासिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने यह बात कही कि भारत ने अपने पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह तक पहुंचकर अपनी वैज्ञानिक क्षमता का लोहा मनवाया था और हाल ही में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग कर इतिहास रचा। इसी प्रकार कोरोना महामारी के दौरान भारत ने न सिर्फ अपनी स्वदेशी वैक्सीन विकसित कर दुनिया का सबसे बड़ा सफल टीकाकरण अभियान चलाया, बल्कि दर्जनों जरूरतमंद देशों को जीवनरक्षक टीके उपलब्ध कराकर वैश्विक संकट में मानवीय सहायता का नया मानक स्थापित किया। यह देश की वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता और संकटकाल में समाधान तलाशने की असाधारण योग्यता का जीवंत प्रमाण है।
पीएम मोदी ने देश की समृद्ध प्राचीन वैज्ञानिक विरासत को आधुनिक अनुसंधान से जोड़ने पर विशेष बल दिया। उन्होंने यह बात कही कि शून्य की अवधारणा, संख्या प्रणाली और खगोल विज्ञान में भारत का ऐतिहासिक योगदान आज भी विश्व ज्ञान का आधार है। विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के उद्देश्य से ऊर्जा सुरक्षा को अहम बताते हुए प्रधानमंत्री ने परमाणु ऊर्जा और फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने यह जानकारी दी कि भारत के 500 मेगावाट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने पहली बार क्रिटिकलिटी हासिल कर ली है, जो देश की दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता और परमाणु अनुसंधान के क्षेत्र में मील का पत्थर है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग और ग्रीन एनर्जी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने यह बात कही कि इन समस्त आधुनिक तकनीकों के विकास के उद्देश्य से एक सुदृढ़ अनुसंधान इकोसिस्टम और प्रशिक्षित मानव संसाधन अत्यंत जरूरी हैं। भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (UPI) और स्वदेशी 5G नेटवर्क की वैश्विक स्वीकार्यता का उदाहरण देते हुए उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवा वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, शोधकर्ताओं और इनोवेटिव स्टार्टअप उद्यमियों के समर्पण से भारत भविष्य की तकनीकों के निर्माण में दुनिया का नेतृत्व करने में पूरी तरह से सफल होगा।





