Sonia Vihar Murder Case: मनीष यादव हत्याकांड का खुलासा, पत्नी से शादी करना चाहता था आरोपी; सात आरोपी पकड़े गए
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सोनिया विहार में मनीष यादव की गोली मारकर हत्या के मामले में पुलिस ने कथित साजिश का खुलासा करने का दावा किया है। जांच के तहत कुल सात लोगों को गिरफ्तार या पकड़ा गया है, जिनमें दो विधि-विवादित बच्चे शामिल बताए गए हैं। पुलिस ने एक पिस्टल, दो जिंदा कारतूस और मोटरसाइकिल बरामद होने की जानकारी दी है। मामले की कड़ियां जोड़ने के लिए बड़ी संख्या में सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, तकनीकी जानकारी, गवाहों के बयान और डिजिटल भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की गई।
पुलिस की जानकारी के अनुसार, 13 अक्टूबर 2026 की रात करीब 9 बजकर 10 मिनट पर सोनिया विहार के 4.5 पुश्ता इलाके में एक व्यक्ति को गोली मारे जाने की सूचना मिली थी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो पता चला कि घायल मनीष यादव को उपचार के लिए सिविल लाइंस स्थित सुश्रुत ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया है। हालांकि, उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। शुरुआती जानकारी में सूचना देने वाले विवेक सिंह ने बताया था कि हेलमेट पहने मोटरसाइकिल सवार दो हमलावरों ने मनीष के सिर में नजदीक से गोली मारी और फिर मौके से फरार हो गए। इसके पश्चात सोनिया विहार थाने में हत्या और आर्म्स एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सोनिया विहार थाना पुलिस, एएटीएस और उत्तर-पूर्वी जिला स्पेशल स्टाफ की संयुक्त टीमें गठित की गईं। पड़ताल के दौरान घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। पुलिस ने संदिग्ध मोटरसाइकिल की गतिविधियों का पता लगाने के साथ वारदात से पहले और बाद में आरोपियों की संभावित आवाजाही का विश्लेषण किया। इस बीच पुलिस को शिकायतकर्ता विवेक सिंह के बयानों में कुछ विसंगतियां दिखाई दीं, जिसके बाद उसकी भूमिका की भी गहन जांच की गई। पुलिस का दावा है कि इन प्रयासों के आधार पर कथित साजिश में शामिल लोगों की पहचान करने और हत्या की परिस्थितियों को समझने में मदद मिली।
पुलिस के अनुसार, जांच में उमेश मौर्य उर्फ मयंक, विवेक सिंह, आनंद और उनके कथित सहयोगियों की भूमिका सामने आई। पुलिस का यह आरोप लगाया गया है कि उमेश मौर्य की मनीष यादव और उसकी पत्नी से पहले से जान-पहचान थी। पड़ताल के दौरान यह आरोप सामने आया कि उमेश मनीष को रास्ते से हटाकर उसकी पत्नी से शादी करना चाहता था। पुलिस का दावा है कि इसी उद्देश्य से हत्या की साजिश रची गई। हालांकि, आरोपी के मकसद और साजिश से जुड़े इन आरोपों की पुष्टि अदालत में साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से होनी बाकी है।
पुलिस की जांच के मुताबिक, कथित साजिश के तहत दो विधि-विवादित बच्चों को दो लाख रुपये में हत्या की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पुलिस का यह आरोप लगाया गया है कि वारदात में इस्तेमाल की गई पिस्टल भीम सिंह के माध्यम से उपलब्ध कराई गई, जबकि कारतूस जुटाने में एक अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आई। इसके अतिरिक्त, वारदात के लिए मोटरसाइकिल की व्यवस्था भी कथित तौर पर एक सहयोगी की मदद से की गई थी। जांच में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार, मनीष को घर से बाहर बुलाने के लिए एक हजार रुपये लौटाने का बहाना बनाया गया था। पुलिस का यह आरोप लगाया गया है कि जैसे ही मनीष बाहर आया, दोनों विधि-विवादित बच्चों ने उसके सिर के पास गोली चलाई और मोटरसाइकिल से फरार हो गए।
पुलिस की जानकारी के अनुसार, वारदात के बाद मोटरसाइकिल को यमुना खादर के रिज क्षेत्र में छोड़ दिया गया था। पड़ताल के दौरान वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की गई और विवेक सिंह की ओर से एक विधि-विवादित बच्चे को कथित तौर पर किए गए यूपीआई भुगतान की जानकारी सामने आई। पुलिस इस लेनदेन को मामले की कड़ियों से जोड़कर देख रही है। अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य तकनीकी जानकारी का विश्लेषण आरोपियों की भूमिका और कथित साजिश के संबंधों को स्पष्ट करने के लिए किया गया।
हथियार उपलब्ध कराने के आरोप में भीम सिंह को भी पकड़ा गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान उसने दावा किया कि पिस्टल उसके मृत भाई की थी, जिसकी करीब तीन साल पहले तिमारपुर इलाके में हत्या हुई थी। पुलिस अब इस दावे की जांच करने के साथ हथियार के स्रोत और उसके इस्तेमाल से संबंधित परिस्थितियों का पता लगा रही है। बरामद पिस्टल, कारतूस और मोटरसाइकिल को मामले के साक्ष्यों के रूप में जांच के दायरे में रखा गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फॉरेंसिक जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की पुष्टि जारी है।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस प्रकरण में विवेक सिंह, उमेश मौर्य उर्फ मयंक, आनंद, नितिन उर्फ नरेंद्र और भीम सिंह को गिरफ्तार किया गया है। इसके अतिरिक्त दो विधि-विवादित बच्चों को पकड़ा गया है। पुलिस सभी आरोपियों की भूमिका, कथित साजिश में उनकी भागीदारी और अन्य संभावित सहयोगियों के संबंध में आगे की जांच कर रही है। यह कार्रवाई एसीपी खजूरी खास यतिन शर्मा के नेतृत्व और उत्तर-पूर्वी जिले के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त अरविंद कुमार की निगरानी में की गई। पुलिस टीम में सोनिया विहार थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर प्रफुल्ल कुमार झा, एएटीएस प्रभारी इंस्पेक्टर दीपक पांडेय, एटीओ इंस्पेक्टर दीपक वर्मा सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज, फॉरेंसिक साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और वित्तीय लेनदेन के आधार पर प्रत्येक आरोपी की भूमिका की जांच जारी है। मामले में बरामद हथियारों और अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण भी जारी है। पुलिस का दावा है कि जांच के जरिए हत्या के पीछे की कथित साजिश का खुलासा हुआ है, लेकिन आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत में होगा। वर्तमान में पुलिस मामले के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है, ताकि हत्या से जुड़े घटनाक्रम और इसमें शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका को स्पष्ट किया जा सके।


