POCSO Case: किशोरी को बंधक बनाकर यौन उत्पीड़न करने के दोषी को पांच साल की सजा, 20 हजार रुपये जुर्माना
नोएडा में पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत ने 14 वर्षीय किशोरी को बंधक बनाने और यौन उत्पीड़न के मामले में नया हैबतपुर निवासी शिवम साहू को दोषी करार देते हुए पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। साथ ही जुर्माने की 80 प्रतिशत राशि पीड़िता के पुनर्वास पर खर्च करने का आदेश दिया है। यह मामला वर्ष 2018 का है, जिसमें पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच की थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 28 मार्च 2018 की शाम करीब छह बजे की है। पीड़िता के पिता ने सेक्टर-20 थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी बेटी शौचालय जाने के लिए निकली थी, लेकिन काफी देर तक वापस नहीं लौटी। परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। इसी दौरान एक बच्ची से जानकारी मिली कि किशोरी शिवम साहू के कमरे में बंद है।
शिकायत के मुताबिक, शिवम ने किशोरी को पकड़कर अपने कमरे में खींच लिया था। आरोप था कि उसने गमछे से किशोरी का मुंह और हाथ-पैर बांध दिए तथा कमरे के बाहर ताला लगाकर वहां से चला गया। बेटी के कमरे में बंद होने की जानकारी मिलने पर परिजन मकान मालिक की मदद से वहां पहुंचे और ताला तोड़कर उसे बाहर निकाला। किशोरी उस समय बंधी हुई मिली थी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और मामले में मुकदमा दर्ज किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में छह गवाह पेश किए। उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद विशेष अदालत ने शिवम साहू को पॉक्सो एक्ट की धारा 8 और भारतीय दंड संहिता की धारा 342 के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के बजाय पॉक्सो एक्ट की धारा 8 के तहत सजा सुनाई।
अदालत ने दोषी को पांच साल के सश्रम कारावास के साथ 20 हजार रुपये का जुर्माना भरने का निर्देश दिया। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 357 के तहत जुर्माने की 80 प्रतिशत राशि पीड़िता के पुनर्वास पर खर्च करने का आदेश भी दिया गया है। फैसले के साथ अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
