Noida Roads: नोएडा में बारिश से जर्जर हुईं सड़कें, करोड़ों की रिसर्फेसिंग के बावजूद गड्ढे और बिखरी रोड़ी बढ़ा रही हादसों की चिंता
नोएडा। बारिश के मौसम में नोएडा की कई प्रमुख सड़कों की खराब हालत एक बार फिर सामने आई है। शहर की कई सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं, सड़क की ऊपरी परत उखड़ने लगी है और कई हिस्सों में रोड़ी तथा सड़क निर्माण की सामग्री बिखरी हुई दिखाई दे रही है। कुछ स्थानों पर सड़क से ईंटें तक बाहर निकल आई हैं। इससे वाहन चालकों, खासकर दोपहिया वाहन सवारों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है।
सड़कों की खराब हालत के साथ लगातार उड़ रही धूल भी आसपास रहने वाले लोगों और सड़क से गुजरने वाले वाहन चालकों की परेशानी बढ़ा रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब नोएडा प्राधिकरण हर साल सड़कों की रिसर्फेसिंग और मरम्मत पर करोड़ों रुपये खर्च करता है, तो कुछ ही वर्षों में सड़कें खराब स्थिति में क्यों पहुंच रही हैं।
नोएडा प्राधिकरण की ओर से इस साल भी करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से सड़कों की रिसर्फेसिंग के लिए टेंडर जारी किए गए हैं। कई सड़कों पर काम पूरा होने का दावा किया गया है, जबकि शहर के कई प्रमुख मार्गों पर अभी भी सड़क की स्थिति खराब बनी हुई है। प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने सड़कों की स्थिति की जांच कराने के साथ काम पूरा करने के लिए 28 अक्टूबर की समयसीमा तय की है।
चौड़ा मोड़ से एडोब चौराहे तक सड़क बदहाल
चौड़ा मोड़ से एडोब चौराहे तक का मार्ग नोएडा की प्रमुख सड़कों में शामिल है। इस सड़क से रोजाना बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं। यह मार्ग एमपी-1, एमपी-2 और एमपी-3 जैसे प्रमुख मार्गों को जोड़ता है। इसके बावजूद सड़क के किनारे का बड़ा हिस्सा कई जगहों से उखड़ा हुआ है।
सड़क के बीच से लेकर किनारों तक रोड़ी बिखरी हुई है। बारिश के बाद सड़क की स्थिति और खराब होने से दोपहिया वाहन चालकों के लिए फिसलने का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों के अनुसार, रोड़ी पर वाहन का संतुलन बिगड़ने से हादसे की आशंका बनी रहती है। एडोब चौराहे से चौड़ा मोड़ की तरफ जाने वाले हिस्से में भी सड़क की स्थिति बेहतर नहीं बताई जा रही है।
दिल्ली से जोड़ने वाले मार्ग पर भी गड्ढों की समस्या
नोएडा को दिल्ली से जोड़ने वाले मार्ग के एक हिस्से में भी सड़क की हालत खराब है। हरिदर्शन चौकी से करीब 50 कदम की दूरी पर सड़क पर बड़े गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। कई स्थानों पर सड़क की सतह टूटने के कारण ईंटें बाहर निकल आई हैं।
वाहन चालकों के मुताबिक, इस हिस्से से गुजरते समय कई वाहन क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। खासकर रात के समय गड्ढों और उखड़ी सड़क का पता चलना मुश्किल हो जाता है, जिससे दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है। इसके बावजूद इस हिस्से की रिसर्फेसिंग का काम अभी तक पूरा नहीं हो सका है।
बोटेनिकल गार्डन के पास डीएससी रोड भी खराब
बोटेनिकल गार्डन के पास डीएससी रोड का हिस्सा भी कई जगहों पर जर्जर स्थिति में है। बोटेनिकल गार्डन नोएडा का प्रमुख परिवहन केंद्र है, जहां से शहर के अलग-अलग हिस्सों के साथ ग्रेटर नोएडा, अलीगढ़, आगरा और अन्य शहरों के लिए भी बसों का संचालन होता है।
इस कारण इस मार्ग पर रोजाना बड़ी संख्या में यात्रियों और वाहनों की आवाजाही रहती है। सड़क की खराब स्थिति से यातायात प्रभावित होने के साथ यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के बाद सड़क पर पानी और गड्ढों की स्थिति वाहन चालकों के लिए अतिरिक्त चुनौती बन जाती है।
चार साल में सड़क खराब हुई तो संबंधित कंपनी की जिम्मेदारी
सड़कों की गुणवत्ता को लेकर नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश के अनुसार, जिन सड़कों के लिए चार साल की अवधि वाले टेंडर किए गए हैं, उनकी जांच कराई जा रही है।
टेंडर की शर्तों के अनुसार संबंधित सड़क को चार साल तक टिकाऊ रहना चाहिए। यदि निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले सड़क खराब हो जाती है तो उसकी मरम्मत की जिम्मेदारी संबंधित कंपनी की होती है। ऐसे में प्राधिकरण यह जांच कर रहा है कि जिन सड़कों को अभी चार साल पूरे नहीं हुए हैं, वे समय से पहले क्यों खराब हो गईं।
प्राधिकरण की जांच में सड़क निर्माण की गुणवत्ता, इस्तेमाल की गई सामग्री, जल निकासी व्यवस्था और रिसर्फेसिंग के बाद सड़क की स्थिति जैसे पहलुओं को देखा जा सकता है। यदि निर्धारित मानकों के अनुरूप काम नहीं पाया जाता है तो संबंधित एजेंसी की जवाबदेही तय की जा सकती है।
शहर में लगातार बारिश के दौरान सड़क की खराब होती स्थिति ने एक बार फिर सड़क निर्माण और रखरखाव की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित किया है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि सड़कें कुछ वर्षों में उखड़ने लगती हैं तो इससे न केवल सरकारी धन के इस्तेमाल पर सवाल उठते हैं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा भी प्रभावित होती है। अब प्राधिकरण की जांच और निर्धारित समयसीमा में होने वाला काम यह तय करेगा कि इन सड़कों की समस्या कितनी जल्दी और कितनी स्थायी तरीके से दूर की जाती है।


