Noida Elevated Road: 450 करोड़ की लागत से बनी एलिवेटेड रोड पर मरम्मत के बाद फिर हुआ गहरा गड्ढा, आईआईटी रुड़की करेगी जांच
नोएडा शहर की लाइफलाइन मानी जाने वाली 4.8 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड की गुणवत्ता और निर्माण पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सेक्टर-27 से सेक्टर-60 को जोड़ने वाली इस एलिवेटेड रोड पर सेक्टर-33 स्थित इस्कॉन मंदिर के सामने सेक्टर-18 की तरफ जाने वाले मार्ग पर मरम्मत के कुछ ही घंटों बाद दोबारा गहरा गड्ढा हो गया। सड़क की ऊपरी बिटुमिन परत के अचानक टूटने और धंसने से नीचे लगा स्टील स्ट्रक्चर और कंक्रीट का ढांचा सीधे बाहर दिखने लगा है, जिससे तेज रफ्तार वाहनों के लिए एक बड़ा खतरा पैदा हो गया। रविवार को जब यहां की सतह धंसी थी, तब प्राधिकरण के मेंटेनेंस विभाग ने त्वरित मरम्मत कर आवागमन शुरू करा दिया था, लेकिन मंगलवार को उसी स्थान पर दोबारा आधा वर्ग मीटर क्षेत्र में सड़क धंस जाने से अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए।
करीब 450 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार हुई इस सड़क को वर्ष 2017 में आम जनता के लिए खोला गया था। महज कुछ वर्षों के भीतर बार-बार सड़क का धंसना और पिछले महीने भी सेक्टर-18 की ओर उतरने वाले रैंप पर गड्ढा होना इसके बुनियादी ढांचे में किसी बड़ी तकनीकी खामी की ओर इशारा कर रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए नोएडा प्राधिकरण ने अब इसकी उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने का फैसला किया है। इसके तहत आईआईटी रुड़की और उत्तर प्रदेश स्टेट ब्रिज कॉरपोरेशन के विशेषज्ञ इंजीनियरों की संयुक्त टीम सड़क की ऊपरी परत से लेकर नीचे के मुख्य पिलर और स्टील स्ट्रक्चर तक की गहन जांच करेगी। यह टीम पता लगाएगी कि क्या यह समस्या केवल डामर और गिट्टी की ऊपरी परत तक सीमित है या फिर पूरे एलिवेटेड स्ट्रक्चर में कोई गंभीर आंतरिक टूट-फूट हुई है।
इस घटना के बाद से एलिवेटेड रोड की दो लेन पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया है। प्राधिकरण ने सुरक्षा के लिहाज से प्रभावित हिस्से पर बैरिकेडिंग लगा दी है, जिसके चलते सेक्टर-61 और आसपास के इलाकों से सेक्टर-18 की ओर आने वाले वाहन चालकों को भीषण जाम और भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दैनिक यात्रियों का कहना है कि करोड़ों रुपये के रखरखाव बजट के बावजूद सड़क की यह हालत निर्माण और मरम्मत दोनों में घोर लापरवाही को उजागर करती है। तकनीकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि इस मार्ग के स्थायी सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे और घटिया मरम्मत कार्य के लिए कौन से अधिकारी या ठेकेदार जिम्मेदार हैं।


