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Noida Consumer Court: उपभोक्ता आयोग में महीने में 15 दिन सुनवाई, फैसलों की संख्या घटी

Noida Consumer Court: उपभोक्ता आयोग में महीने में 15 दिन सुनवाई, फैसलों की संख्या घटी

नोएडा। गौतमबुद्धनगर जिला उपभोक्ता आयोग में महीने में केवल 15 दिन ही मामलों की सुनवाई हो पा रही है। इसका असर लंबित वादों के निस्तारण पर पड़ रहा है। कई मामलों में निर्धारित समय के दौरान सुनवाई का नंबर नहीं आने से पक्षकारों को अगली तारीख काफी आगे की मिल रही है। इससे उपभोक्ताओं को न्याय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर के पास गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद, दोनों जिलों का प्रभार है। ऐसे में उन्हें दोनों जिलों के उपभोक्ता विवादों की सुनवाई करनी पड़ती है। मौजूदा व्यवस्था के तहत महीने की एक से 15 तारीख तक गौतमबुद्धनगर, जबकि 16 तारीख से महीने के अंत तक गाजियाबाद के मामलों की सुनवाई होती है। इस व्यवस्था के चलते गौतमबुद्धनगर आयोग को महीने में सुनवाई के लिए सीमित समय मिल पा रहा है। वादों की संख्या के मुकाबले उपलब्ध कार्यदिवस कम होने से सभी मामलों की सुनवाई कर पाना चुनौती बन रहा है। नियमित न्यायिक कार्यों के बीच कई वादों की सुनवाई नहीं हो पाती, जिसके कारण अगली तारीख देनी पड़ती है। इसका सीधा असर मामलों के निस्तारण की गति पर पड़ रहा है।

आयोग में सुनवाई के दिनों की कमी का असर आदेशों की संख्या पर भी दिखाई दे रहा है। पहले हर महीने करीब 70 से 75 मामलों में आदेश पारित किए जाते थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर लगभग 30 से 35 रह गई है। यानी पहले की तुलना में फैसलों की संख्या में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है।

आदेशों की संख्या घटने से लंबित मामलों के निस्तारण की रफ्तार प्रभावित हो रही है। वहीं, सुनवाई के लिए लंबी तारीखें मिलने से उपभोक्ताओं को अपने विवादों के समाधान के लिए अधिक समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में आयोग में सुनवाई के लिए उपलब्ध समय और मामलों के बढ़ते दबाव के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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