Thursday, 5 November 2026निष्पक्ष खबरें • बेबाक नज़रिया
TOP STORY
THE COMPLETE NEWSROOMखबर पूरी। नज़रिया साफ़।भारत से आपके शहर तक
▤ ई-पेपर पढ़ें ↗
BREAKING NEWS
Hapur News : मावा फैक्ट्री पर खाद्य विभाग का छापा, 3.20 लाख का खोया नष्ट करायाLucknow : इंडी गठबंधन के नेतृत्वकर्ताओं में क्लैरिटी, कैपेसिटी और क्रेडिबिलिटी का अभाव- मुख्यमंत्रीGorakhpur : राहुल फुस्स रॉकेट, अखिलेश हार के बहानेबाज- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथLucknow : योगी सरकार की पहल से परिषदीय विद्यालयों में पर्यावरण संरक्षण का पाठLucknow : दीपोत्सव में दिखेगा लोक संस्कृति का महाकुंभLucknow : योगी सरकार 49 संकेतकों के आधार पर कर रही महिला सशक्तीकरण की योजनाओं का जिलावार आकलनLucknow : दिव्यांगजन के हुनर को बाजार और पहचान दिलाएगी योगी सरकार, 5-6 नवंबर को लगेगा ‘दिव्य दीपावली मेला’Ayodhya : दसवें दीपोत्सव में राम की पैड़ी के 56 घाटों पर सजेगी 30 लाख दीपों की आभा

New Delhi : कांग्रेस ने विपक्ष के साथ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया, लोकसभा अध्यक्ष ने सचिवालय को कार्रवाई के निर्देश दिए

New Delhi (डॉ.अनिल सिंह) : कांग्रेस पार्टी ने कई विपक्षी दलों के समर्थन से लोकसभा में केंद्र सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस प्रस्तुत किया है। यह नोटिस नियम 94(सी) के तहत लोकसभा के महासचिव को सौंपा गया है। इस पहल में अनेक विपक्षी दल शामिल हैं, हालांकि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने स्वयं को इस प्रस्ताव से अलग रखा है।

सूत्रों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर संज्ञान लेते हुए लोकसभा महासचिव को नियमों के अनुसार उपयुक्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद लोकसभा सचिवालय द्वारा प्रस्ताव को औपचारिक रूप से प्राप्त कर लिया गया है और वह इस समय परीक्षण (examination) की प्रक्रिया में है। आवश्यक संवैधानिक और प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद इसे आगे विचारार्थ (consideration) रखा जाएगा।

संसदीय परंपरा के अनुसार, अविश्वास प्रस्ताव का उद्देश्य सरकार को सदन के पटल पर अपना बहुमत सिद्ध करने का अवसर देना होता है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार महंगाई, बेरोज़गारी, आर्थिक असमानता, संघीय ढांचे के मुद्दों तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली से जुड़े प्रश्नों पर जवाबदेही से बच रही है। कांग्रेस का कहना है कि इस प्रस्ताव के माध्यम से सरकार को इन विषयों पर सदन में स्पष्ट जवाब देना होगा।

प्रक्रिया के तहत, लोकसभा अध्यक्ष द्वारा नोटिस को स्वीकार किए जाने के बाद प्रस्ताव को सदन की कार्यसूची में शामिल किया जाता है। इसके पश्चात अध्यक्ष की अनुमति से चर्चा की तिथि तय होती है। चर्चा के दौरान विपक्ष सरकार की नीतियों की आलोचना करता है, जबकि सत्तापक्ष अपने निर्णयों और उपलब्धियों का बचाव करता है। अंत में मतदान के ज़रिये यह तय होता है कि सरकार को सदन का विश्वास प्राप्त है या नहीं।

वर्तमान बजट सत्र के दौरान लगातार व्यवधान और स्थगन के चलते सदन की कार्यवाही पहले ही प्रभावित रही है। ऐसे में विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव को सरकार से जवाबदेही तय करने के एक संवैधानिक और लोकतांत्रिक माध्यम के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। दूसरी ओर, सत्तापक्ष का दावा है कि उसके पास स्पष्ट बहुमत है और वह सदन में किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

अब सभी की निगाहें लोकसभा अध्यक्ष के अगले कदम और सचिवालय की प्रक्रिया पर टिकी हैं। यदि प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जाता है, तो यह न केवल सरकार के संख्या-बल की परीक्षा होगा, बल्कि संसद में लोकतांत्रिक संवाद, बहस और जवाबदेही की भूमिका को भी रेखांकित करेगा।

इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया

Avatar photo
संवाददाता

SHAHRUKH KHAN

संबंधित खबरें