Sanitation Workers: सफाई कर्मियों के सम्मान और सुरक्षा पर NCSK का फोकस, 23 अगस्त को 32वां स्थापना दिवस
नई दिल्ली, 21 अगस्त। सफाई कर्मियों की गरिमा, सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक कल्याण को मजबूत करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (एनसीएसके) 23 अगस्त को अपना 32वां स्थापना दिवस मनाएगा। दिल्ली के मावलंकर ऑडिटोरियम में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में करीब 900 सफाई कर्मियों के साथ विभिन्न सरकारी संस्थानों और संबंधित संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।
स्थापना दिवस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, रामदास आठवले और बीएल वर्मा मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान सफाई कर्मियों से जुड़े मुद्दों, उनकी कार्यस्थल सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच बढ़ाने जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग स्थापना दिवस के अवसर पर हितधारकों के लिए एक मिस्ड-कॉल सुविधा नंबर भी जारी करेगा। इस सुविधा के माध्यम से सफाई कर्मियों को अपनी समस्याएं और शिकायतें दर्ज कराने का एक अतिरिक्त माध्यम उपलब्ध कराया जाएगा। इसका उद्देश्य शिकायतों को संबंधित स्तर तक पहुंचाने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
आयोग का प्रमुख जोर खतरनाक परिस्थितियों में होने वाली मैनुअल स्कैवेंजिंग को खत्म करने और सफाई कार्यों में आधुनिक मशीनों का अधिक से अधिक इस्तेमाल बढ़ाने पर रहेगा। सीवर और सेप्टिक टैंक जैसे जोखिम वाले स्थानों पर मानव श्रम पर निर्भरता कम कर सफाई व्यवस्था के मशीनीकरण को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की जाएगी।
इसके अलावा सफाई कर्मियों के पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने पर भी आयोग का ध्यान रहेगा। सफाई कर्मियों और उनके परिवारों को उपलब्ध सरकारी योजनाओं तथा दूसरी कल्याणकारी सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
सीवर की सफाई के दौरान होने वाली मौतें भी आयोग के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेंगी। ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों को निर्धारित मुआवजा दिलाने और संबंधित व्यवस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करने पर आयोग काम करता रहेगा।
एनसीएसके का उद्देश्य सफाई कर्मियों से जुड़े मामलों को केवल रोजगार तक सीमित न रखते हुए उनकी सुरक्षा, सम्मान, पुनर्वास और सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार से जोड़ना है। 32वें स्थापना दिवस के जरिए इन मुद्दों पर संबंधित सरकारी एजेंसियों और हितधारकों के बीच समन्वय बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।


