नई दिल्ली: मासूमों के जी का जंजाल बन रही मूंगफली 

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नई दिल्ली: मासूमों के जी का जंजाल बन रही मूंगफली
-बच्चों के जीवन के लिए संकट पैदा कर रहा सांस की नली में फंसा मूंगफली का दाना

नई दिल्ली, 22 अक्तूबर :अगर मूंगफली का दाना खाते समय आपके बच्चे को खांसी का धसका आ जाए और उसके बाद सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है या सांस लेने के दौरान अजीब सी आवाज आ रही है तो सतर्क हो जाएं। हो सकता है, आपके बच्चे के सांस के रास्ते में मूंगफली का दाना फंस गया हो, जिसके चलते उसे सांस लेने परेशानी हो रही हो। ऐसे में देर न करें तुरंत नजदीकी अस्पताल में डॉक्टर से संपर्क करें।

दरअसल, सर्दी के मौसम में गरम – गरम मूंगफली खाना लगभग सभी पसंद करते हैं। इसके दाने सूखे मेवे जैसा स्वाद और मजा देते हैं जिसके चलते माता-पिता भी अपने बच्चों को मूंगफली खाने के लिए प्रेरित करते हैं, लेकिन यह स्वाद तब बेमजा हो जाता है। जब छोटे बच्चे मूंगफली के दाने को चबाकर निगलने की बजाए उसे अपनी सांस की नली में फंसा लेते हैं। हालांकि मूंगफली का सेवन सिर्फ स्वाद के लिए ही अच्छा नहीं है। इसके दानों में प्रोटीन, फाइबर, स्वस्थ वसा, विटामिन और खनिज भी होते हैं जो सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं।

बच्चों में क्यों होती है ये समस्या ?
लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज से संबद्ध कलावती सरन अस्पताल के बाल-श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. कमल कुमार सिंघल के मुताबिक अगर बच्चा मूंगफली खा रहा है और उसे अचानक जोर से धसका आ जाता है तो इसका मतलब यह हो सकता है कि वह मूंगफली का दाना निगलने की बजाए शायद सांस के रास्ते में ले गया है। यह दाना अक्सर सांस की नली में जाकर अटक जाता है जिससे बच्चे की सांस भी रुक सकती है। डॉ. सिंघल ने बताया, जब हम कुछ खाते हैं तब गले में मौजूद एपिग्लॉटिस फ्लैप सक्रिय हो जाता है यह एक छोटा, लचीला ऊतक होता है जो निगलते समय श्वास नली के द्वार को बंद कर देता है। ताकि भोजन और तरल पदार्थ फेफड़ों में न जा सकें। यह सांस लेने के दौरान खुला रहता है। यह कॉर्डिनेशन छोटे बच्चों में अच्छा नहीं होता है। गौरतलब यह भी है कि तीन वर्ष से कम आयु के बच्चों के मुंह में पिछले दांत नहीं होते, वे खाने की चीजों को चबाने के बजाय निगल जाते हैं। इन दोनों वजहों से मूंगफली या चना या कोई दाना उनके सांस के रास्ते में फंसने संभावना बढ़ जाती है।

बचाव के लिए क्या करें ?
तीन साल से छोटे बच्चों को मूंगफली या ऐसा कोई दाना जिसे चबाना अनिवार्य होता है खाने के लिए ना दें। अगर खिलाना जरूरी हो तो मूंगफली के दानों को बारीक कूटकर बच्चे को खिलाएं।

अगर सांस नली में फंस जाए मूंगफली ?
डॉ. सिंघल के मुताबिक सांस की नली में मूंगफली फंसने पर उसे ब्रोंकोस्कोपी की तकनीक से निकाला जाता है। आम तौर पर इसे ऑपरेशन थियेटर में बच्चे को पूरी तरह से बेहोश करके रिजिड ब्रोंकोस्कोपी से निकाला जाता है जिसमें ऑपरेशन थियेटर तथा एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की आवश्यकता होती है। किंतु आजकल इसे फ्लेक्सिबल ब्रोंकोस्कोपी के जरिए भी निकाला जाता है। इस तकनीक में ना ऑपरेशन थियेटर की जरुरत होती है और ना एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की। बच्चे को दर्द रोकने का तथा हल्का नींद का इंजेक्शन दिया जाता है। एक पतली, लचीली ट्यूब (ब्रोंकोस्कोप) जिसके सिरे पर एक कैमरा और लाइट होती है, उसको नाक या मुंह के माध्यम से डाला जाता है और सांस नली में फंसे मूंगफली के दाने या अन्य वस्तु को निकाल दिया जाता है। कुछ ही घंटों में मरीज को अस्पताल से छुट्टी भी मिल जाती है। डॉ. सिंघल ने बताया कि कलावती सरन बाल चिकित्सालय में प्रतिवर्ष 50 से ज्यादा ऐसे मामले आते हैं जिनमें बच्चे की सांस की नली में मूंगफली फंसने से जीवन का संकट बना होता है। यह प्रक्रिया कुछ अस्पतालों में बिलकुल मुफ्त है।

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