Hidma Encounter: हिडमा मुठभेड़ के बाद ऑक्टोपस की बड़ी कार्रवाई, आंध्र प्रदेश में छिपे 31 माओवादी और समर्थक गिरफ्तार, प्रवासी मजदूरों का भेष रचकर घुसपैठ की कोशिश नाकाम
अल्लूरी सीताराम राजू जिले के मारेदमुल्ली में शीर्ष माओवादी नेता माड़वी हिडमा सहित छह माओवादियों के ढेर होने के कुछ घंटे बाद ही आंध्र प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियों ने तेज छापेमारी अभियान शुरू कर दिया। खुफिया इनपुट के आधार पर राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया था कि माओवादी संगठन के सदस्य प्रवासी मजदूरों का वेश बनाकर आंध्र प्रदेश में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे हैं। इस अलर्ट के बाद आतंकवाद निरोधी स्पेशल यूनिट ‘ऑक्टोपस’ और स्थानीय पुलिस ने विजयवाड़ा, कृष्णा और एनटीआर जिलों में बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चलाकर 31 माओवादी और उनके समर्थकों को गिरफ्तार किया।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक महेश चंद्र लड्ढा ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में नौ ऐसे व्यक्ति शामिल हैं जो प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नए महासचिव थिप्पीरी तिरुपति उर्फ देवूजी के पूर्व निजी सुरक्षा गार्ड रह चुके हैं। बाकी गिरफ्तार लोग दक्षिण बस्तर की विभिन्न माओवादी बटालियन से जुड़े हुए बताए गए हैं। लड्ढा के अनुसार, छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ते दबाव और मुठभेड़ों के चलते ये सभी आंध्र प्रदेश में पनाह लेने की कोशिश कर रहे थे और कई दिनों से इनकी गतिविधियों की निगरानी की जा रही थी।
विजयवाड़ा के न्यू ऑटोनगर इलाके में ऑक्टोपस कमांडो ने एक चार मंजिला इमारत को घेर लिया, जहां लगभग 21 माओवादी प्रवासी मजदूरों के तौर पर छिपकर रह रहे थे। सभी छत्तीसगढ़ के निवासी हैं। ऑपरेशन शुरू होते ही कुछ माओवादी भाग निकले, लेकिन अधिकांश को हिरासत में ले लिया गया। इसके अलावा अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर 10 और संदिग्ध माओवादियों को पकड़ा गया, जो स्थानीय समर्थकों के घरों में छिपे हुए थे। हालांकि किसी के पास हथियार नहीं मिले, लेकिन पुलिस ने उनसे बरामद डायरी, नोटबुक और संपर्क नंबरों की लिस्ट को बेहद महत्वपूर्ण बताया है, जो शहरी नेटवर्क से जुड़े लोगों तक पहुंच बनाने में उपयोगी हो सकती है।
हिडमा की मुठभेड़ में मौत के बाद माओवादी संगठन में नेतृत्व को लेकर असहज स्थिति पैदा हो गई है। बसवराज की मौत के बाद देवूजी को महासचिव बनाया गया था, लेकिन सूत्रों के मुताबिक उनका प्रभाव गणपति या बसवराज जैसे नेताओं की तुलना में काफी कम है। तेलंगाना मूल के होने से तेलंगाना माओवादी नेटवर्क में भी उनका समर्थन घट रहा है, जिसकी वजह से उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को बिखरकर सुरक्षा घेरे से बचने की सलाह दी हुई हो सकती है।
आंध्र पुलिस ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी परिस्थिति में माओवादियों को राज्य में नया ठिकाना बनाने नहीं देंगे। छत्तीसगढ़ में दबाव बढ़ने के बाद माओवादी लगातार सीमावर्ती जिलों में पनाह लेने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षा बलों ने उनकी योजनाओं पर लगातार प्रहार करने का फैसला किया है। राज्य के विभिन्न शहरों में अलर्ट जारी कर दिया गया है और प्रवासी मजदूरों के रूप में आने वालों की कड़ी जांच की जा रही है।
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