Haryana Tourism: गुरु दर्शन, कैलाश मानसरोवर और सिंधु दर्शन यात्रा के लिए अब दोगुने श्रद्धालुओं को मिलेगी आर्थिक सहायता : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी
रिपोर्ट : कोमल रमोला
चंडीगढ़, 22 अक्टूबर (कोमल रमोला)। हरियाणा सरकार ने धार्मिक यात्राओं पर जाने वाले श्रद्धालुओं को आर्थिक सहायता देने की योजना का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने घोषणा की है कि अब स्वर्ण जयंती गुरु दर्शन यात्रा, कैलाश मानसरोवर यात्रा और सिंधु दर्शन यात्रा के लिए हर वर्ष 100-100 श्रद्धालुओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इससे पहले इन तीनों यात्राओं के लिए प्रतिवर्ष 50-50 श्रद्धालुओं को ही सहायता दी जाती थी। इस फैसले के तहत प्रत्येक यात्रा के लिए लाभार्थियों की संख्या दोगुनी हो जाएगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने इन यात्राओं के लिए श्रद्धालुओं का पंजीकरण ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक और व्यवस्थित बनाया जा सके।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ये निर्देश बृहस्पतिवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान दिए। बैठक में हरियाणा विजन-2047 के अंतर्गत पर्यटन विभाग की अगले पांच वर्षों की कार्ययोजना पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने पर्यटन विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार करने, उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और हरियाणा को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ प्रदेश में उपलब्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, प्राकृतिक और ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं को भी योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
पर्यटन विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने बैठक में बताया कि राज्य सरकार स्वर्ण जयंती गुरु दर्शन यात्रा के लिए प्रत्येक श्रद्धालु को 20 हजार रुपये, कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए 50 हजार रुपये और सिंधु दर्शन यात्रा के लिए 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करती है। अब तक इन तीनों यात्राओं के लिए प्रतिवर्ष 50-50 श्रद्धालुओं को इस सुविधा का लाभ दिया जाता था। मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों की संख्या बढ़ाकर प्रत्येक यात्रा के लिए 100 करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के पंजीकरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया जाए और सहायता का लाभ केवल पोर्टल पर पंजीकृत श्रद्धालुओं को ही दिया जाए। इससे आवेदन और लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
बैठक के दौरान पर्यटन विभाग के मौजूदा बुनियादी ढांचे और उपलब्ध संसाधनों की भी जानकारी दी गई। डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि हरियाणा में पर्यटन विभाग के अंतर्गत वर्तमान में 42 पर्यटन परिसर, 21 बैंक्वेट एवं कन्वेंशन हॉल, 35 कॉन्फ्रेंस हॉल, 842 वातानुकूलित कमरे, आठ डॉरमेट्री और 243 दुकानें उपलब्ध हैं। विभाग के पास पर्यटन संबंधी गतिविधियों के लिए कुल 1,192 एकड़ भूमि भी है। इसके अलावा प्रदेश में होटल प्रबंधन के पांच संस्थान और 15 पेट्रोल पंप संचालित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से इन सुविधाओं का बेहतर उपयोग करने और पर्यटन क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप उपलब्ध परिसरों तथा अन्य महत्वपूर्ण स्थलों को विकसित करने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने पर्यटन विभाग की महत्वपूर्ण साइट्स का उनकी जरूरत के अनुसार पुनरुद्धार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि व्यापक जनहित और पर्यटन विकास को ध्यान में रखते हुए ऐसी जगहों की पहचान की जाए, जिन्हें लीज या सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल के तहत संचालित किया जा सकता है। ऐसी साइट्स को निजी कंपनियों की भागीदारी से विकसित करने की संभावनाओं पर काम किया जाए, ताकि सुविधाओं में सुधार के साथ पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वेड इन इंडिया’ विजन के तहत पिंजौर में वेडिंग सिटी स्थापित करने की योजना पर भी दिशा-निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने यमुनानगर स्थित सूर्य मंदिर के जीर्णोद्धार, फरीदाबाद में गोल्फ कोर्स विकसित करने और प्रदेश में वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों को बढ़ावा देने के संबंध में भी अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने को कहा।
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन के माध्यम से रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए फार्म स्टे और होमस्टे सुविधाओं को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने हरियाणा विजन-2030 के तहत कृषि-पर्यटन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से फार्म स्टे और होमस्टे इकाइयों के पंजीकरण, विपणन और प्रचार-प्रसार से संबंधित योजना में आवश्यकता के अनुसार संशोधन करने के निर्देश दिए। अधिकारियों के अनुसार, प्रदेश में वर्तमान में 38 फार्म स्टे और 11 होमस्टे पंजीकृत हैं। मुख्यमंत्री ने इनकी कुल संख्या बढ़ाकर 100 तक पहुंचाने के लिए प्रयास करने को कहा। उन्होंने पर्यटन से जुड़ी इकाइयों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने और पर्यटकों के सामने ग्रामीण जीवन, स्थानीय खानपान तथा पारंपरिक जीवनशैली से जुड़े अनुभवों को आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करने की योजना बनाने के निर्देश भी दिए।
ग्रामीण पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों को प्रोत्साहित करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि पर्यटन सूचना केंद्रों पर स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों, हस्तशिल्प और स्थानीय खाद्य पदार्थों को प्रदर्शित करने की व्यवस्था विकसित की जाए। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार होने वाले उत्पादों को व्यापक पहचान मिल सकेगी और महिलाओं सहित स्थानीय उद्यमियों को अपने उत्पादों के प्रचार तथा बिक्री के अधिक अवसर प्राप्त होंगे। मुख्यमंत्री ने कुरुक्षेत्र और प्रदेश के अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर इस मॉडल को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बनाने के निर्देश दिए। इस पहल का उद्देश्य पर्यटन गतिविधियों से स्थानीय लोगों की आय के अवसर बढ़ाना और पर्यटकों को क्षेत्रीय संस्कृति तथा स्थानीय उत्पादों से परिचित कराना है।
मुख्यमंत्री ने कृषि-पर्यटन को नए अनुभवों से जोड़ने के लिए इसी वर्ष गुरुग्राम में मिलेट महोत्सव आयोजित करने की तैयारी करने को कहा। इस महोत्सव के माध्यम से मोटे अनाज, पारंपरिक खानपान और कृषि-पर्यटन को प्रोत्साहित करने की योजना बनाई जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को उन स्थानों पर विशेष मेले आयोजित करने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश भी दिए, जहां खेतों में सरसों और गेहूं की फसल पककर तैयार होती है। इसके अलावा नारनौल क्षेत्र में लिली फ्लावर और शाहबाद के आसपास सूरजमुखी की खेती वाले स्थानों को भी पर्यटन आकर्षण के रूप में विकसित करने की योजना बनाने को कहा गया। ऐसे आयोजनों के जरिए कृषि क्षेत्रों की विशेषताओं को सामने लाने, पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने और स्थानीय लोगों के लिए आर्थिक गतिविधियों के अवसर पैदा करने पर जोर दिया गया।
बैठक में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पर्यटन विभाग से संबंधित मुख्यमंत्री घोषणाओं, बजट घोषणाओं और संकल्प पत्रों में किए गए वादों की प्रगति की भी समीक्षा की। इसके साथ ही सीएम ग्रिवांस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण की स्थिति पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संबंधित योजनाओं और घोषणाओं पर समयबद्ध तरीके से काम किया जाए तथा शिकायतों के समाधान में भी आवश्यक गंभीरता बरती जाए। बैठक में वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल, मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव यशपाल यादव, मुख्यमंत्री के ओएसडी एवं स्वर्ण जयंती हरियाणा राजकोषीय प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू, पर्यटन विभाग के निदेशक पार्थ गुप्ता सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।


