Greater Noida: ग्रेटर नोएडा में पेयजल गुणवत्ता जांच अभियान, 100 से अधिक नमूने लिए गए
नोएडा। ग्रेटर नोएडा में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर उठी शिकायतों के बाद प्राधिकरण ने चार दिनों तक विशेष जांच अभियान चलाया, जिसमें 100 से अधिक पेयजल नमूने एकत्र किए गए। इस अभियान में प्राधिकरण की टीमों के साथ एक स्वतंत्र जांच एजेंसी को भी शामिल किया गया, ताकि पानी की गुणवत्ता को सभी मानकों पर परखा जा सके। नलकूपों, भूमिगत जलाशयों, अपर जलाशयों और घरों से पानी के नमूने लिए गए हैं, जिनकी विस्तृत जांच रिपोर्ट 10 से 12 दिन में आने की उम्मीद है।
दरअसल, आवासीय सेक्टर डेल्टा-1 और अल्फा-2 में बीते सप्ताह दूषित पेयजल की आपूर्ति की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने तत्काल संज्ञान लेते हुए आठ टीमों का गठन किया और ग्रेटर नोएडा व ग्रेटर नोएडा वेस्ट के विभिन्न इलाकों में लगातार चार दिन तक जांच अभियान चलाया। इस दौरान पेयजल आपूर्ति के साथ-साथ सीवर लाइनों का भी निरीक्षण किया गया, ताकि किसी भी तरह के रिसाव या मिलावट की संभावना को खारिज किया जा सके।
जल विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान एक हजार से अधिक स्थानों पर मौके पर ही पानी की प्राथमिक जांच की गई। इसमें टीडीएस, पीएच वैल्यू और क्लोरीन की मात्रा को मापा गया। जांच में टीडीएस की अधिकतम मात्रा 550 दर्ज की गई, जिसे मानकों के अनुरूप बताया गया है और यह पेयजल के उपयोग के लिए सुरक्षित मानी जाती है। प्रारंभिक जांच में पानी की गुणवत्ता संतोषजनक पाई गई है।
प्राधिकरण के वरिष्ठ प्रबंधक जल विनोद कुमार शर्मा ने बताया कि पेयजल की गहन और वैज्ञानिक जांच के लिए श्रीराम इंस्टीट्यूट फॉर इंडस्ट्रियल रिसर्च लैब की दो टीमों को भी लगाया गया था। लैब की टीमों ने अलग-अलग नलकूपों, भूमिगत जलाशयों, ओवरहेड टैंकों और घरों से 100 से अधिक नमूने एकत्र किए हैं। इन नमूनों की विस्तृत जांच सभी निर्धारित मानकों पर की जाएगी, ताकि किसी भी तरह की कमी या खतरे को समय रहते पहचाना जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी बड़े खतरे के संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन अंतिम निर्णय लैब रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर यदि कहीं भी गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित क्षेत्र में तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी, ताकि लोगों को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।


