Thursday, 5 November 2026निष्पक्ष खबरें • बेबाक नज़रिया
TOP STORY
THE COMPLETE NEWSROOMखबर पूरी। नज़रिया साफ़।भारत से आपके शहर तक
▤ ई-पेपर पढ़ें ↗
BREAKING NEWS
Hapur News : मावा फैक्ट्री पर खाद्य विभाग का छापा, 3.20 लाख का खोया नष्ट करायाLucknow : इंडी गठबंधन के नेतृत्वकर्ताओं में क्लैरिटी, कैपेसिटी और क्रेडिबिलिटी का अभाव- मुख्यमंत्रीGorakhpur : राहुल फुस्स रॉकेट, अखिलेश हार के बहानेबाज- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथLucknow : योगी सरकार की पहल से परिषदीय विद्यालयों में पर्यावरण संरक्षण का पाठLucknow : दीपोत्सव में दिखेगा लोक संस्कृति का महाकुंभLucknow : योगी सरकार 49 संकेतकों के आधार पर कर रही महिला सशक्तीकरण की योजनाओं का जिलावार आकलनLucknow : दिव्यांगजन के हुनर को बाजार और पहचान दिलाएगी योगी सरकार, 5-6 नवंबर को लगेगा ‘दिव्य दीपावली मेला’Ayodhya : दसवें दीपोत्सव में राम की पैड़ी के 56 घाटों पर सजेगी 30 लाख दीपों की आभा

राजस्व विभाग में डिजिटल बदलाव से पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित सेवाएं हो रही सुनिश्चित: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

राजस्व विभाग में डिजिटल बदलाव से पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित सेवाएं हो रही सुनिश्चित: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

रिपोर्ट: कोमल रमोला

चंडीगढ़, 19 जुलाई – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को हरियाणा निवास चंडीगढ़ में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए डिजिटल गवर्नेंस, भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण तथा नागरिक-केंद्रित सुधारों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राजस्व विभाग की प्रत्येक सेवा पारदर्शी, तकनीक आधारित और निर्धारित समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराई जाए ताकि नागरिकों को बिना किसी अनावश्यक देरी के सुगम सेवाएं मिल सकें। बैठक में प्रदेश के सभी जिला उपायुक्त, डीएमसी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं वित्त आयुक्त, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि विभाग ने मई 2025 में अपना पहला इन-हाउस सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) प्रभाग स्थापित कर व्यापक डिजिटल परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया । इससे बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता कम हुई है तथा विभागीय डिजिटल प्लेटफॉर्म के विकास और रखरखाव में तेजी आई है। इस तकनीकी टीम में सॉफ्टवेयर डेवलपर, यूआई/यूएक्स डिजाइनर, तकनीकी दस्तावेज विशेषज्ञ तथा सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर सहित 16 स्वीकृत पद शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने एकीकृत राजस्व पोर्टल (इंटीग्रेटेड रेवेन्यू पोर्टल) की प्रगति की समीक्षा की। उन्हें बताया गया कि यह पोर्टल नागरिकों और विभागीय अधिकारियों के लिए एकीकृत डिजिटल मंच के रूप में विकसित किया गया है। इसके माध्यम से नागरिकों को ऑनलाइन राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। पोर्टल में अधिकारियों के लिए सिंगल साइन-ऑन प्रणाली तथा सेवा वितरण एवं लंबित मामलों की रियल टाइम निगरानी के लिए एकीकृत डैशबोर्ड की सुविधा भी उपलब्ध है।

राजस्व शिकायत निवारण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री ने शिकायत निवारण प्रणाली की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इसे अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक हितैषी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र नागरिक को न्याय मिलना चाहिए। जिन आवेदकों के आवेदन अस्वीकृत हुए हैं और यदि वे निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं तो उन्हें पुनर्विचार का उचित अवसर दिया जाना चाहिए।

शिकायत डैशबोर्ड की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी आवेदनों के निपटान में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए। प्रत्येक अस्वीकृत आवेदन में अस्वीकृति का स्पष्ट कारण दर्ज किया जाए तथा उसका समुचित रिकॉर्ड रखा जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अस्वीकृत मामलों की समय-समय पर रैंडम जांच की जाए ताकि किसी भी पात्र व्यक्ति को प्रक्रियागत त्रुटि या गलत जांच के कारण लाभ से वंचित न रहना पड़े।

मुख्यमंत्री ने सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए कि जिलों में आयोजित किए जा रहे साप्ताहिक समाधान शिविरों में तहसीलदारों तथा राजस्व विभाग के अन्य अधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए ताकि मौके पर ही राजस्व से जुड़ी समस्याओं का समाधान संभव हो सके

मिशन मोड में होगा भूमि अभिलेखों का आधुनिकीकरण

मुख्यमंत्री ने राज्य के भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए इसकी प्रगति की जानकारी ली। उन्हें बताया गया कि अब तक 40.20 करोड़ से अधिक पुराने राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है, जिससे राज्य में डिजिटल भूमि अभिलेख उपलब्ध हो पाया है।

ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से लगभग 44 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर किया जा चुका है, जबकि राज्य की भू-स्थानिक (जियोस्पेशियल) संरचना को मजबूत करने के लिए 19 कंटीन्यूअसली ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन (सीओआरएस) स्थापित किए गए हैं।

बैठक में बताया गया कि राज्य के 99 प्रतिशत गांवों के नक्शों का जियो-रेफरेंसिंग कार्य पूरा हो चुका है। लगभग 60 लाख ततीमा नक्शों को अद्यतन किया गया है तथा रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (अधिकार अभिलेख) का लगभग 60 प्रतिशत मानकीकरण किया जा चुका है। डिजिटलीकृत अभिलेखों में से 99.5 प्रतिशत से अधिक का प्रथम स्तर का सत्यापन भी पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम को पूर्ण करने के निर्देश दिए।

बैठक में बताया गया कि नागरिक-केंद्रित सुधारों के तहत 6,761 गांवों में संपत्ति कार्ड तैयार कर लगभग 25.16 लाख संपत्ति मालिकों को वितरित किए जा चुके हैं। लगभग 95 प्रतिशत गांवों के नक्शे भू-नक्शा पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं। पारदर्शिता एवं प्रामाणिकता बढ़ाने के लिए लगभग 42 लाख आधार नंबर पुराने राजस्व अभिलेखों से जोड़े जा चुके हैं तथा नागरिकों की सुविधा के लिए आईटी हेल्पडेस्क भी स्थापित किया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि विभाग ने पांच लाख से अधिक लंबित इंतकाल (म्यूटेशन) मामलों का निपटारा किया है। सरल पोर्टल की लगभग 80 प्रतिशत सेवाओं को ऑटो अपील प्रणाली से जोड़ा जा चुका है ताकि निर्धारित समय से अधिक लंबित मामलों का स्वतः उच्च स्तर पर संज्ञान लिया जा सके और सेवाओं का समयबद्ध वितरण सुनिश्चित हो। डिजिटल पंजीकरण सुधारों से 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व संग्रह हो पाया है।

मुख्यमंत्री ने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि कागज रहित दस्तावेज पंजीकरण व्यवस्था की नियमित निगरानी करें। अधिकारियों ने बताया कि दस्तावेज पंजीकरण की प्रक्रिया अब पूर्णतः एंड-टू-एंड पेपरलेस हो चुकी है तथा लंबित मामलों की निगरानी के लिए सार्वजनिक लाइव डैशबोर्ड भी उपलब्ध है।

सभी भूमि पंजीकरण कार्यालयों में नागरिकों के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित हों

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी भूमि पंजीकरण कार्यालयों में आने वाले नागरिकों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कार्यालय में उचित वेटिंग रूम सहित सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों। साथ ही सभी कार्यालयों में क्यू मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जाए तथा डिजिटल स्क्रीन पर टोकन नंबर प्रदर्शित किए जाएं ताकि नागरिकों को व्यवस्थित और सुविधाजनक ढंग से सेवाएं प्राप्त हो सकें।

मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी कार्यक्रम (सीएमजीजीए) के परियोजना निदेशक डॉ. यशपाल ने बताया कि पेपरलेस प्रणाली के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अब तक 12,300 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। जियो-रेफरेंस गांवों के आंकड़ों के सत्यापन के लिए जिलों की नियमित निगरानी की जा रही है ताकि लैंड डिमार्केशन को अधिक सटीक एवं पारदर्शी बनाया जा सके।

इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया

Avatar photo
संवाददाता

Priyanka Singh

संबंधित खबरें