Delhi Student Hostel: राजधानी में 10 हजार छात्रों के लिए बनेंगे हॉस्टल, जगह चिह्नित; नीति बनाने का काम शुरू
नई दिल्ली। दिल्ली में बाहर से पढ़ने आने वाले छात्रों को सुरक्षित और बेहतर आवास देने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 10 हजार छात्रों के लिए हॉस्टल सुविधा विकसित करने की योजना की जानकारी दी है। सरकार के मुताबिक इसके लिए जगह की पहचान हो चुकी है और अब संबंधित नीति तैयार की जा रही है। हाल ही में सत्य निकेतन में निजी छात्रावास की इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के बाद छात्रों के लिए सुरक्षित आवास और निजी PG-हॉस्टलों की निगरानी का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया है।
दिल्ली में देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में छात्र विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने आते हैं। सरकारी और विश्वविद्यालय स्तर पर हॉस्टल सीटें सीमित होने के कारण अधिकांश छात्रों को निजी PG, किराये के कमरे और प्राइवेट हॉस्टलों पर निर्भर रहना पड़ता है, खासकर दिल्ली विश्वविद्यालय के आसपास मांग काफी ज्यादा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार DU से जुड़े 77 कॉलेजों में से केवल करीब 20 में हॉस्टल सुविधा है, जबकि 57 कॉलेजों में हॉस्टल नहीं हैं — और मौजूदा क्षमता भी छात्रों की कुल संख्या के मुकाबले काफी कम बताई जा रही है।
इसी कमी को देखते हुए दिल्ली सरकार बड़े स्तर पर छात्र आवास विकसित करने की दिशा में बढ़ रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक 10 हजार छात्रों के लिए हॉस्टल बनाने की योजना पर काम शुरू हो चुका है, उपयुक्त स्थान चिह्नित किया जा चुका है और अब नीति का प्रारूप तैयार हो रहा है। योजना को अंतिम रूप मिलने के बाद ही साफ होगा कि हॉस्टल किस मॉडल पर बनेंगे, संचालन किस एजेंसी के जरिए होगा और आवंटन व शुल्क की व्यवस्था क्या रहेगी।
सत्य निकेतन हादसे के बाद उपराज्यपाल की मंजूरी से शिक्षा मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में 18 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति भी गठित की गई है। समिति को दिल्ली में छात्रों के लिए उपलब्ध हॉस्टल व अन्य आवास की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर का आकलन करने की जिम्मेदारी दी गई है। यह भी देखा जाएगा कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और अन्य सरकारी एजेंसियों की खाली या कम इस्तेमाल हो रही संपत्तियों का उपयोग छात्र आवास के लिए कैसे किया जा सकता है। समिति को सिफारिशें देने के लिए 60 दिन का समय मिला है।
उपराज्यपाल ने DDA को छात्र PG और हॉस्टल विकसित करने के लिए उपयुक्त जमीन चिह्नित करने के निर्देश भी दिए हैं। मकसद ऐसे स्थानों पर व्यवस्थित छात्र आवास तैयार करना है, जहां सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके। सरकार की कोशिश निजी और अनियंत्रित PG व्यवस्था पर छात्रों की अत्यधिक निर्भरता कम करते हुए उन्हें सुरक्षित व व्यवस्थित विकल्प देने की है।
इसके साथ निजी PG और हॉस्टलों को नियंत्रित करने के लिए अलग नियामक व्यवस्था पर भी काम चल रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था में PG प्रतिष्ठानों के लिए लाइसेंस, पुलिस क्लीयरेंस और स्ट्रक्चरल व फायर सेफ्टी से जुड़े NOC जैसी शर्तें लागू करने की योजना है। हर पंजीकृत PG को यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर देने और उसकी जानकारी केंद्रीकृत सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी है, ताकि छात्र और अभिभावक किसी PG में रहने से पहले उसकी वैधता व सुरक्षा की जानकारी ले सकें।
सरकार सिर्फ कमरों की उपलब्धता ही नहीं, भवनों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान देने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री ने PG, हॉस्टल और सार्वजनिक इस्तेमाल वाली इमारतों के लिए स्ट्रक्चरल ऑडिट तथा नियमित सुरक्षा प्रमाणन की जरूरत पर जोर दिया है। सत्य निकेतन हादसे के बाद यह सवाल उठा है कि PG या हॉस्टल के रूप में इस्तेमाल हो रही इमारतें संरचनात्मक और अग्नि सुरक्षा मानकों पर खरी उतरती हैं या नहीं, और नई व्यवस्था में इन पहलुओं की नियमित जांच पर जोर रहने की संभावना है।
दिल्ली विश्वविद्यालय भी अपनी हॉस्टल क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है। विश्वविद्यालय में हजारों नई हॉस्टल सीटें जोड़ने की योजना है, जिससे मौजूदा क्षमता में बड़ा इजाफा हो सकता है। इसके अलावा कॉलेजों को भी अपने स्तर पर छात्रावास विकसित करने की संभावनाओं पर काम करने को कहा गया है, ताकि विश्वविद्यालय के आसपास निजी PG और किराये के कमरों पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सके।
छात्र आवास का मामला दिल्ली हाई कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। सत्य निकेतन हादसे के बाद दाखिल एक जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय को नोटिस जारी किया है। याचिका में DU से जुड़े कॉलेजों में हॉस्टल सुविधाओं के विकास के लिए समयबद्ध नीति बनाने की मांग की गई है, और मामले में अगली सुनवाई 25 सितंबर को होनी है।
सरकार की यह योजना ऐसे समय सामने आई है जब राजधानी में छात्र आवास की उपलब्धता, किराया, सुरक्षा और निजी PG के नियमन पर व्यापक चर्चा चल रही है। योजना फिलहाल नीति निर्माण के चरण में है, इसलिए हॉस्टल कहां बनेंगे, निर्माण कब शुरू होगा और कमरे किस प्रक्रिया से मिलेंगे — इन सवालों के विस्तृत जवाब नीति को अंतिम रूप मिलने के बाद ही सामने आएंगे।
अगर योजना तय तरीके से आगे बढ़ती है तो राजधानी में पढ़ने वाले हजारों छात्रों को सुरक्षित और व्यवस्थित आवास का नया विकल्प मिल सकता है। साथ ही निजी PG और हॉस्टलों के लिए प्रस्तावित लाइसेंसिंग व सुरक्षा नियम लागू होने से मौजूदा व्यवस्था में भी बदलाव आ सकता है। फिलहाल सरकार का ध्यान 10 हजार छात्रों के लिए हॉस्टल योजना को नीति का रूप देने और छात्र आवास से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर है।


