Corrosion Protection: जंग और वेल्डिंग की खामियों से बचेंगे देश के अहम ढांचे, समय रहते जांच पर जोर
नई दिल्ली/चेन्नई, 20 अगस्त। देश के पुल, कारखानों, पाइपलाइनों और अन्य महत्वपूर्ण ढांचों को जंग, दरारों और वेल्डिंग की खामियों से बचाने के लिए समय रहते उनकी जांच और निगरानी जरूरी है। इसी दिशा में चेन्नई ट्रेड सेंटर में गुरुवार को आईसीईएनडीई-2026 की शुरुआत हुई। सम्मेलन में विशेषज्ञों ने आधुनिक जांच तकनीकों के इस्तेमाल और ढांचागत सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया।
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने ऐसी तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की, जिनकी मदद से किसी मशीन, उपकरण या ढांचे को तोड़े या नुकसान पहुंचाए बिना उसकी अंदरूनी खामियों का पता लगाया जा सकता है। इन तकनीकों के जरिए जंग, दरार, वेल्डिंग में खराबी और अन्य संरचनात्मक कमजोरियों की शुरुआती स्तर पर पहचान संभव है।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी बड़े ढांचे में छोटी खराबी को नजरअंदाज करना आगे चलकर गंभीर हादसे का कारण बन सकता है। यदि समय रहते खामी की पहचान कर आवश्यक मरम्मत कर दी जाए तो न केवल दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलती है, बल्कि मशीनों और ढांचों की उपयोगी उम्र भी बढ़ाई जा सकती है।
सम्मेलन में जंग से होने वाले आर्थिक नुकसान को लेकर भी चिंता जताई गई। विशेषज्ञों के मुताबिक, जंग के कारण देश की जीडीपी को करीब 4.2 फीसदी तक नुकसान होता है। ऐसे में औद्योगिक और सार्वजनिक ढांचों की नियमित जांच तथा समय पर रखरखाव आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
आईसीईएनडीई-2026 में उद्योग, सरकार और शोध संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। 22 अगस्त तक चलने वाले सम्मेलन में गैर-विनाशकारी परीक्षण और निरीक्षण से जुड़ी नई तकनीकों, शोध और उनके व्यावहारिक इस्तेमाल पर मंथन किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक जांच तकनीकों के व्यापक इस्तेमाल से देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाया जा सकता है। साथ ही समय रहते खराबियों का पता लगाकर रखरखाव की लागत और बड़े हादसों के जोखिम को भी कम किया जा सकता है।


