Child Safety: दिल्ली में बाल सुरक्षा को लेकर DCPCR की बड़ी पहल, बाल भिक्षावृत्ति रोकने और स्कूलों में आत्मरक्षा प्रशिक्षण पर जोर
रिपोर्ट: रवि डालमिया
नई दिल्ली। दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग यानी DCPCR ने बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर कई अहम पहलों की जानकारी दी है। कश्मीरी गेट स्थित आयोग के मुख्यालय में 24 सितंबर को आयोजित मीडिया कॉन्फ्रेंस में दिल्ली में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, नाबालिगों से जुड़े मामलों में तेजी से कार्रवाई करने, बाल भिक्षावृत्ति को खत्म करने और स्कूलों में आत्मरक्षा प्रशिक्षण को बढ़ावा देने से संबंधित प्रयासों पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम को DCPCR के अध्यक्ष डॉ. ओ. पी. व्यास तथा आयोग की सदस्य स्वाति गुप्ता, कुंदन कंसकर और राहुल गौतम ने संबोधित किया। इस दौरान आयोग की ओर से बताया गया कि बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के साथ लिया जा रहा है। आयोग ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न विभागों और संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया जा रहा है।
आयोग ने दिल्ली के सभी विद्यालयों में नियमित आत्मरक्षा प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाने की दिशा में भी पहल की है। इसके लिए उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और नगर निगम के महापौर तथा आयुक्त को औपचारिक पत्र भेजे गए हैं। आयोग का कहना है कि स्कूल स्तर पर आत्मरक्षा प्रशिक्षण बच्चों, विशेषकर छात्राओं में सुरक्षा के प्रति जागरूकता और आपात स्थिति में स्वयं की रक्षा करने की क्षमता विकसित करने में मदद कर सकता है।
बैठक में पॉक्सो यानी बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाले कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया। आयोग की ओर से बताया गया कि POCSO जागरूकता अभियान के तहत बच्चों, अभिभावकों और स्कूल स्टाफ को कानून की प्रमुख जानकारियां दी जा रही हैं।
जागरूकता कार्यक्रमों में सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श की पहचान, किसी संदिग्ध या अनुचित व्यवहार की स्थिति में भरोसेमंद व्यक्ति को जानकारी देने और समय पर शिकायत दर्ज कराने जैसे विषय शामिल किए जा रहे हैं। आयोग का उद्देश्य बच्चों को अपने अधिकारों और संभावित खतरे की पहचान के बारे में जानकारी देना है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में वे मदद मांग सकें।
बाल भिक्षावृत्ति को खत्म करने के लिए भी DCPCR ने इसे अपनी प्रमुख पहलों में शामिल किया है। आयोग के अनुसार, केवल बच्चों को सड़क या सार्वजनिक स्थानों से रेस्क्यू कर लेना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ उनकी दीर्घकालिक देखभाल, भावनात्मक पुनर्वास और शिक्षा से दोबारा जुड़ाव पर भी ध्यान देना जरूरी है।
आयोग का कहना है कि बाल भिक्षावृत्ति के पीछे मौजूद परिस्थितियों को समझना और बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना जरूरी है। रेस्क्यू किए गए बच्चों की देखभाल, उनके पुनर्वास और उन्हें औपचारिक शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए संबंधित विभागों और संस्थाओं के साथ समन्वय किया जा रहा है।
राष्ट्रीय पोषण माह के तहत भी आयोग की ओर से विभिन्न व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया गया। इसके अंतर्गत केंद्रीय रसोईघरों, आंगनवाड़ी केंद्रों और बच्चों तथा माताओं के लिए संचालित खाद्य वितरण व्यवस्थाओं की स्थिति की समीक्षा की गई। इन निरीक्षणों का उद्देश्य बच्चों और महिलाओं को मिलने वाली पोषण संबंधी सुविधाओं की जमीनी स्थिति का जायजा लेना बताया गया।
DCPCR के अनुसार, 8 जुलाई 2026 से अब तक आयोग ने 377 सक्रिय मामलों में कार्रवाई की है। इनमें 56 मामलों में आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया। आयोग ने बताया कि ये मामले बच्चों से जुड़े कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों से संबंधित हैं, जिनमें POCSO, किशोर न्याय, बाल श्रम और शिक्षा का अधिकार शामिल हैं।
आयोग ने बच्चों और आम नागरिकों से अपील की कि किसी भी संकट, शोषण या बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में तुरंत संबंधित हेल्पलाइन से संपर्क किया जाए। इसके लिए राष्ट्रीय बाल हेल्पलाइन 1098 और DCPCR की समर्पित हेल्पलाइन 922099390 का उपयोग करने की जानकारी दी गई।

बाल अधिकारों से जुड़े मामलों में समय पर शिकायत और सूचना मिलने को महत्वपूर्ण माना जाता है। आयोग का कहना है कि किसी बच्चे के साथ हिंसा, शोषण, उत्पीड़न, बाल श्रम या शिक्षा से वंचित किए जाने की स्थिति में देरी किए बिना संबंधित एजेंसियों तक जानकारी पहुंचनी चाहिए।
मीडिया कॉन्फ्रेंस के दौरान आयोग ने यह भी संकेत दिया कि बच्चों की सुरक्षा केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। पुलिस, शिक्षा विभाग, नगर निकाय, सामाजिक संस्थाएं, स्कूल प्रबंधन, अभिभावक और नागरिक समाज सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशील रवैया और त्वरित कार्रवाई को आवश्यक बताया गया।
कार्यक्रम के अंत में आयोग के सदस्य कुंदन कंसकर ने मीडिया और नागरिक समाज का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बच्चों की सुरक्षा को लेकर सभी संबंधित विभागों और संस्थाओं से संवेदनशीलता, बेहतर समन्वय और समयबद्ध कार्रवाई के साथ काम करने की अपील की।
DCPCR की ओर से बताया गया कि बाल सुरक्षा से जुड़ी पहलों को आगे भी जारी रखा जाएगा। स्कूलों में सुरक्षा जागरूकता, आत्मरक्षा प्रशिक्षण, POCSO कानून की जानकारी, बाल भिक्षावृत्ति के खिलाफ अभियान और बच्चों के पुनर्वास जैसे मुद्दों पर निरंतर काम करने की योजना है।
फिलहाल आयोग की ओर से सामने रखे गए आंकड़े और पहल दिल्ली में बाल अधिकारों से जुड़े मामलों की निगरानी तथा हस्तक्षेप के प्रयासों को रेखांकित करते हैं। आने वाले समय में इन पहलों के क्रियान्वयन और विभिन्न विभागों के समन्वय से बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को किस स्तर तक मजबूत किया जाता है, इस पर नजर रहेगी।


