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Bihar : सेवा ही सबसे बड़ा सम्मान, 100 वर्ष के हुए पद्मश्री डॉ. दिलीप कुमार सिंह, बोले विदेश छोड़ गांव लौटना जीवन का सबसे सही फैसला

Bhagalpur (मृत्युंजय) : बिहार के भागलपुर जिले के पीरपैंती की मिट्टी ने देश को एक ऐसे चिकित्सक दिया, जिन्होंने अपना पूरा जीवन गरीब, बेसहारा और जरूरतमंद लोगों की सेवा के नाम समर्पित कर दिया। पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने अपने जीवन के 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं। शतायु होने के अवसर पर उन्होंने अपने संघर्ष, सेवा और समाज के प्रति समर्पण की यादें साझा कीं।

डॉ. सिंह ने बताया कि विदेशों में चिकित्सा सेवा देने के अवसर मिलने के बावजूद उन्होंने अपनी जन्मभूमि पीरपैंती लौटकर लोगों की सेवा करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी, आचार्य विनोबा भावे और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के विचारों ने उन्हें समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने की प्रेरणा दी। यही सेवा भावना उन्हें वर्ष 2021 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान तक लेकर गई।

पोलियो मैन के नाम से पहचान बनाने वाले डॉ. सिंह ने बताया कि भारत का पहला पोलियो शिविर भागलपुर के पीरपैंती में आयोजित किया गया था। इसके बाद हजारों बच्चों और परिवारों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचीं। उन्होंने कुष्ठ रोगियों के उपचार को भी अपने जीवन का महत्वपूर्ण मिशन बनाया और बापू की प्रेरणा से हजारों मरीजों का निःस्वार्थ इलाज किया।

डॉ. सिंह ने कहा कि मोतियाबिंद उन्मूलन अभियान हो या नशा मुक्ति आंदोलन, उनका उद्देश्य हमेशा समाज को स्वस्थ और जागरूक बनाना रहा। उन्होंने आजादी के बाद के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों में भी यदि सेवा का संकल्प मजबूत हो तो बड़े बदलाव संभव हैं।

26 जून 1926 को जन्मे डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने अपने 100वें जन्मदिवस पर केंद्र और राज्य सरकार से गरीबों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को और अधिक सुलभ एवं प्रभावी बनाने की अपील की। इस अवसर पर उनके पुत्र डॉ. संजय कुमार सिंह ने कहा कि पिता की सेवा करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। उन्होंने कहा कि 100 वर्ष पूरे होने पर पिता का आशीर्वाद मिलना उनके लिए किसी पुरस्कार से कम नहीं है।

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