
Darbhanga (मृत्युंजय) : जिले में बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। कई गांवों का सड़क संपर्क पूरी तरह टूट चुका है और लोग आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेने को मजबूर हैं। जिला प्रशासन राहत और बचाव के पूरे इंतजाम का दावा कर रहा है, लेकिन बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी नाव पर भी तेल के नाम पर 10 रुपये प्रति व्यक्ति वसूले जा रहे हैं।
नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश और कोसी बैराज से छोड़े गए पानी के बाद दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान पूर्वी और घनश्यामपुर प्रखंड में कोसी और कमला बलान नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। बाढ़ का पानी निचले इलाकों में फैलने से इटहर, उसरी, उजुआ सिमरटोका और तिलकेश्वर पंचायत के कई गांव जलमग्न हो चुके हैं। कई जगहों पर सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है, जिससे ग्रामीणों की आवाजाही केवल नाव के भरोसे रह गई है।
बाढ़ का असर शिक्षा और खेती पर भी साफ दिखाई दे रहा है। प्राथमिक विद्यालय लक्ष्मीनिया और इटहर पोखर परिसर में पानी घुस चुका है, जबकि किसानों की फसलें भी डूबने लगी हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियातन करीब दो दर्जन गांवों को खाली कराने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन का दावा है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नाव, राहत शिविर और सामुदायिक रसोई सहित सभी जरूरी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी नाव पर भी तेल के नाम पर प्रति व्यक्ति 10 रुपये लिए जा रहे हैं। इस आरोप ने राहत व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।





