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Autism Cases Rising: देश में हर 31 में 1 बच्चा प्रभावित, समय पर पहचान बेहद जरूरी

Autism Cases Rising: देश में हर 31 में 1 बच्चा प्रभावित, समय पर पहचान बेहद जरूरी

नई दिल्ली में विशेषज्ञों ने ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता जताई है। ताजा आकलन के अनुसार अब हर 31 बच्चों में से 1 बच्चा ऑटिज्म से प्रभावित पाया जा रहा है, जबकि पहले यह आंकड़ा 89 में 1 था। यह बदलाव न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ती इस समस्या की ओर इशारा करता है।

All India Institute of Medical Sciences Delhi के बाल चिकित्सा विभाग की प्रोफेसर Shefali Gulati ने बताया कि ऑटिज्म केवल एक मेडिकल स्थिति नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की वास्तविकता बन चुका है। उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली, बढ़ता प्रदूषण और सामाजिक परिवर्तनों के कारण यह समस्या और गंभीर होती जा रही है।

एम्स के अध्ययन में सामने आया है कि 80 प्रतिशत से अधिक ऑटिज्म प्रभावित बच्चों में मिर्गी, ध्यान की कमी, व्यवहारिक समस्याएं और नींद से जुड़ी दिक्कतें भी पाई जाती हैं। इससे न केवल बच्चे बल्कि उनके परिवार भी मानसिक और सामाजिक दबाव का सामना करते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऑटिज्म के बढ़ते मामलों के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं—आनुवंशिक (जीन से जुड़े कारक), एपिजेनेटिक (जीन के कार्य करने के तरीके में बदलाव) और पर्यावरणीय कारण जैसे प्रदूषण, खान-पान और जीवनशैली। इन सभी का संयुक्त प्रभाव बच्चों के मानसिक विकास पर पड़ता है।

डॉक्टरों का कहना है कि ऑटिज्म के शुरुआती लक्षण 12 से 18 महीने की उम्र में ही दिखाई देने लगते हैं। इनमें बोलने में देरी, आंखों से संपर्क कम होना, सामाजिक व्यवहार में बदलाव और अकेले रहने की प्रवृत्ति शामिल हैं। ऐसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि समय पर पहचान और सही थेरेपी से बच्चों के विकास में काफी सुधार संभव है।

विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अपील की है कि यदि बच्चों में ऐसे कोई लक्षण दिखाई दें तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें। जागरूकता, शुरुआती हस्तक्षेप और सही देखभाल से ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों को बेहतर जीवन दिया जा सकता है।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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