AIIMS Delhi: विश्व के 10 शीर्ष अस्पतालों में छठे स्थान पर, भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को वैश्विक पहचान

AIIMS Delhi विश्व के 10 शीर्ष अस्पतालों में छठे स्थान पर, भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को वैश्विक पहचान

नई दिल्ली, 8 फरवरी। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी AIIMS Delhi ने एक बार फिर भारत और दक्षिण एशिया का नाम वैश्विक मंच पर रोशन किया है। ब्रांड फाइनेंस ग्लोबल टॉप 250 हॉस्पिटल रैंकिंग 2026 में एम्स दिल्ली को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ 10 अस्पतालों में छठा स्थान मिला है। इस उपलब्धि के साथ एम्स न केवल देश का बल्कि पूरे दक्षिण एशिया का सर्वोच्च रैंकिंग वाला अस्पताल बन गया है, जिसे भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

इस प्रतिष्ठित वैश्विक रैंकिंग में एम्स दिल्ली ने अमेरिका के जॉन्स हॉपकिन्स मेडिसिन, मायो क्लिनिक और ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल्स जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के दिग्गज संस्थानों के साथ अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। सीमित संसाधनों के बावजूद एम्स का इस सूची में शीर्ष स्थानों में पहुंचना भारतीय स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, समर्पण और विश्वसनीयता को दर्शाता है।

ब्रांड फाइनेंस की रिपोर्ट के अनुसार, एम्स दिल्ली को यह स्थान केयर परसेप्शन, ब्रांड वैल्यू, ब्रांड स्ट्रेंथ और वैश्विक प्रतिष्ठा जैसे महत्वपूर्ण मानकों पर बेहतरीन प्रदर्शन के आधार पर मिला है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि केयर स्कोर के मामले में एम्स टॉप रैंक वाले अस्पताल से केवल 1.1 अंक पीछे रहा। यह अंतर बेहद कम है और यह दर्शाता है कि सीमित बजट और भारी मरीज भार के बावजूद एम्स ने अंतरराष्ट्रीय स्तर की चिकित्सा सेवाएं प्रदान की हैं।

एम्स प्रशासन ने इस उपलब्धि को संस्थान से जुड़े डॉक्टरों, नर्सों, शोधकर्ताओं, छात्रों और सभी कर्मचारियों की सामूहिक मेहनत का परिणाम बताया है। संस्थान की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि एम्स दिल्ली का उद्देश्य केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं देना, मेडिकल रिसर्च को बढ़ावा देना और भविष्य के डॉक्टरों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करना भी इसका मूल मिशन है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रैंकिंग भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर वैश्विक भरोसे को और मजबूत करती है। AIIMS Delhi की यह उपलब्धि न केवल देश के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि भारतीय सरकारी संस्थान अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरने की क्षमता रखते हैं। आने वाले वर्षों में एम्स की यह पहचान भारत को वैश्विक हेल्थकेयर मैप पर और मजबूत स्थिति दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी।

ममूटी ने कहा कि उन्हें ‘मेगास्टार’ की उपाधि पसंद नहीं है, उन्हें लगता है कि उनके जाने के बाद लोग उन्हें याद नहीं रखेंगे

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