AIIMS Delhi: एम्स दिल्ली में विकसित स्वदेशी ब्लडलेस ब्रेन सर्जरी ने 12 वर्षीय बच्ची को मिर्गी से दिलाई राहत

AIIMS Delhi: एम्स दिल्ली में विकसित स्वदेशी ब्लडलेस ब्रेन सर्जरी ने 12 वर्षीय बच्ची को मिर्गी से दिलाई राहत

नई दिल्ली। दिन में सौ से अधिक बार मिर्गी के दौरे झेलने वाली मरीजों के लिए एम्स दिल्ली ने एक नई स्वदेशी तकनीक ‘रोबोटिक-थर्मो कोएगुलेटिव हेमिसफेरोटॉमी’ (आरओ-टीसीएच) विकसित की है, जो ब्लडलेस ब्रेन सर्जरी के रूप में जाने जाती है। इस तकनीक से न केवल मरीज को मिर्गी रोग से निजात मिलती है, बल्कि ब्रेन सर्जरी के दौरान रक्तस्राव भी अत्यंत कम होता है।

न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. पी. सरत चंद्रा ने बताया कि आज ही 12 वर्षीय बच्ची की सर्जरी आरओ-टीसीएच तकनीक से सफलतापूर्वक की गई। बच्ची एपिलेप्सिया पार्शियलिस कॉन्टिनुआ (ईपीसी) से पीड़ित थी, और सर्जरी से पहले वह बोल नहीं पा रही थी तथा अपने शरीर का दाहिना हिस्सा हिला नहीं पा रही थी। सर्जरी के अगले दिन बच्ची सामान्य रूप से बोलने लगी, अपना दाहिना हिस्सा हिला सकी और उसे कोई मिर्गी का दौरा नहीं पड़ा।

डॉ. चंद्रा ने बताया कि इजरायल के तेल अवीव मेडिकल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जोनाथन रोथ और प्रोफेसर इडो स्ट्रॉस को भी एम्स दिल्ली में आरओ-टीसीएच तकनीक में प्रशिक्षित किया गया। यह तकनीक विशेष रूप से हेमिस्फेरिक एपिलेप्सी वाले बच्चों के लिए उपयोगी है, जिन पर दवाओं का असर नहीं होता। अब तक देश में इस तकनीक से 40 मरीजों का इलाज हुआ है, जिनमें 80% मरीजों को मिर्गी के दौरे नहीं आए।

आरओ-टीसीएच तकनीक में मस्तिष्क के रोगग्रस्त हिस्से को रेडियो फ्रीक्वेंसी ऊर्जा की मदद से स्वस्थ हिस्से से अलग किया जाता है, जिससे बड़े चीरे लगाने और खून बहने की जरूरत समाप्त हो जाती है। इस प्रक्रिया में औसतन सिर्फ 5 मिलीलीटर रक्त का नुकसान होता है। एम्स ने भारत के अलावा मोरक्को और इंडोनेशिया में भी मिर्गी सर्जरी प्रोग्राम स्थापित करने में मदद की है।

न्यूरोलॉजी की हेड प्रोफेसर मंजरी त्रिपाठी ने बताया कि दुनिया भर में लगभग 5 करोड़ लोग और भारत में 1.20 करोड़ लोग मिर्गी से पीड़ित हैं। मिर्गी के 75% मामलों में दवाओं से इलाज संभव है, लेकिन 25% से अधिक ड्रग रेजिस्टेंट मिर्गी वाले मरीजों के लिए सर्जरी आवश्यक होती है। उन्होंने कहा कि भारत की विशेषज्ञता से इजराइल सहित अन्य देशों को लाभ हुआ है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से मिर्गी को हराना संभव होगा।

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