Vote Theft Allegation: दिल्ली के त्रिलोकपुरी में राहुल गांधी का आरोप, 4 बूथों से 416 मतदाताओं के नाम गैरकानूनी तरीके से हटाए गए
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने मंगलवार के दिन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के पूर्वी क्षेत्र स्थित त्रिलोकपुरी में आयोजित एक जनसुनवाई के दौरान देश की चुनाव कार्यवाही और मतदाता सूचियों की बिना पक्षपात वालीता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। राहुल गांधी ने तीखा आरोप लगाते हुए यह दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यवाही के दौरान त्रिलोकपुरी विधानसभा के सिर्फ चार मतदान केंद्रों (बूथों) से 416 वैध मतदाताओं के नाम पूरी तरह से गैरविधिक और मनमाने ढंग से मतदाता सूची से काट दिए गए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए यह बात कही कि विपक्ष द्वारा संसद से लेकर सड़क तक निरंतर ठोस सबूतों के संग सवाल उठाए जाने के बावजूद संवैधानिक संस्थाओं की तरफ से कोई पारदर्शी जवाब नहीं दिया जा रहा है।
त्रिलोकपुरी में आयोजित इस जनसुनवाई में भारी संख्या में स्थानीय नागरिकों, महिलाओं और वंचित वर्ग के लोगों ने भाग लिया और मतदाता सूची से अचानक अपने नाम हटाए जाने की शिकायतें दर्ज कराईं। कांग्रेस के अनुसार, कई ऐसे पीड़ित मतदाता सामने आए जो पिछले कई दशकों से उसी इलाके में रह रहे हैं और हर चुनाव में मतदान करते रहे हैं, लेकिन बिना किसी पूर्व सूचना या जमीनी सत्यापन के उनके नाम मतदाता सूची से गायब कर दिए गए। राहुल गांधी ने नागरिकों की शिकायतों को सुनते हुए यह आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम काटने का यह पहले से रची गई योजना के अनुसार षड्यंत्र खास तौर पर गरीब, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक तबकों को निशाना बनाकर किया जा रहा है, ताकि उनके लोकतांत्रिक मताधिकार को कमजोर किया जा सके। इसके बावजूद, चार बूथों से 416 नाम अवैध रूप से हटाए जाने का यह दावा राहुल गांधी और कांग्रेस द्वारा राजनीतिक मंच से किया गया है, जिसकी सरकारी निर्वाचन रिकॉर्ड से स्वतंत्र पड़ताल और पुष्टि होना जरूरी है।
जनसुनवाई को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में यह बात कही कि मतदान का अधिकार भारत के संविधान द्वारा प्रत्येक नागरिक को दी गई सबसे बुनियादी और मजबूत लोकतांत्रिक शक्ति है और मतदाता सूची में होने वाली किसी भी हेराफेरी को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह आरोप लगाया कि समूचा विपक्ष लंबे समय से चुनावी कार्यवाही और कथित ‘वोट चोरी’ के गंभीर मुद्दे को उठा रहा है, लेकिन चुनाव आयोग इन संवेदनशील शिकायतों पर बिना पक्षपात वाली और संतोषजनक स्पष्टीकरण देने के बजाय चुप्पी साधे हुए है। राहुल गांधी ने यह बात कही कि जब तक इस समूचे प्रकरण में जवाबदेही तय नहीं होती और पारदर्शी पड़ताल नहीं कराई जाती, तब तक कांग्रेस और विपक्षी दल इस मुद्दे पर अपना लोकतांत्रिक विरोध और देशव्यापी जन-आंदोलन जारी रखेंगे।
कांग्रेस सांसद ने आगे यह बात कही कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें पद से नहीं हटाते, तब तक विपक्ष जनता के मताधिकार की रक्षा के उद्देश्य से अपना संघर्ष जारी रखेगा। उन्होंने इस मुद्दे को सिर्फ चुनाव तक सीमित न बताते हुए इसे गरीबों के अस्तित्व और अधिकारों से जोड़ा। उन्होंने यह बात कही कि मतदाता सूची से नाम कटने का सीधा असर गरीबों की नागरिक पहचान और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं, राशन कार्ड तथा आवास जैसी सुविधाओं पर भी पड़ता है, क्योंकि सरकारी तंत्र में वोटर आईडी एक बुनियादी दस्तावेज है। राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए यह आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था देश के आम नागरिकों के बजाय सिर्फ कुछ चुनिंदा बड़े पूंजीपतियों के हितों के उद्देश्य से काम कर रही है।
त्रिलोकपुरी में आयोजित इस जनसुनवाई में राहुल गांधी के संग भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) यानी भाकपा (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य और स्वराज इंडिया के अहम योगेंद्र यादव भी अहमता से मंच पर उपस्थित रहे। दोनों नेताओं ने भी मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने की कार्यवाही की स्वतंत्र न्यायिक पड़ताल की मांग का पुरजोर समर्थन किया। गौर करने वाली बात यह है कि चुनाव आयोग द्वारा चलाई जाने वाली विशेष पुनरीक्षण (SIR) कार्यवाही पर विपक्षी दल पहले भी सवाल खड़े करते रहे हैं, जबकि आयोग का कहना है कि सूचियों का शुद्धिकरण सिर्फ स्थानांतरित या मृत मतदाताओं को नियमानुसार हटाने के उद्देश्य से किया जाता है। त्रिलोकपुरी के इस ताजा राजनीतिक विवाद में 416 नामों को हटाए जाने के आरोपों की वास्तविक स्थिति संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के सरकारी रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।





