Jewar Link Expressway: जेवर लिंक समेत चार एक्सप्रेसवे के लिए 17,542 करोड़ रुपये मंजूर
नोएडा। जेवर लिंक एक्सप्रेसवे के लिए बजट का रास्ता साफ हो गया है। प्रदेश कैबिनेट ने जेवर लिंक समेत चार नए एक्सप्रेसवे के लिए 17542 करोड़ के बजट को मंजूरी दे दी। वहीं, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को लिंक एक्सप्रेसवे की भूमि अधिग्रहण और अन्य विकास कार्यों की समीक्षा भी की। उन्होंने तेजी से भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को पूरा कर जल्द निर्माण शुरू कराने के आदेश दिए। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) गंगा और यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ने के लिए 74.3 किलोमीटर लंबे लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण करेगा। यह यमुना एक्सप्रेसवे पर फिल्म सिटी के नजदीक से शुरू होकर बुलंदशहर के स्याना के पास गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। इसके लिए बुलंदशहर जिला प्रशासन और यमुना प्राधिकरण भूमि खरीद कर रहे हैं। यीडा क्षेत्र में अब तक 95 प्रतिशत तक भूमि खरीदी जा चुकी है। यमुना प्राधिकरण के जिम्मे 740 एकड़ जमीन खरीदनी थी। इसमें से सिर्फ 33 एकड़ भूमि खरीदनी बाकी है। हालांकि, लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर यूपीडा पूर्व में ही टेंडर जारी कर चुका है। वित्तीय बिड की प्रक्रिया जल्द होने वाली है, जिसके बाद विकासकर्ता कंपनी का चयन किया जाएगा। वहीं, अब जेवर लिंक समेत प्रदेश के चार एक्सप्रेसवे के लिए बजट की बाधा भी दूर हो गई है। इन चारों लिंक एक्सप्रेसवे पर कुल 17542 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यूपी कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी है।
चार लिंक एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के विकासकर्ताओं के चयन को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं के निर्माण से प्रदेश के पश्चिमांचल, मध्यांचल और पूर्वांचल क्षेत्रों के बीच संपर्क बेहतर होगा। राजधानी लखनऊ और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से आवागमन अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी। कैबिनेट ने जिन चार परियोजनाओं के विकासकर्ताओं के चयन को मंजूरी दी है, उनमें फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के पैकेज-1 एवं पैकेज-2, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाला लिंक एक्सप्रेसवे, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के पैकेज-1 एवं पैकेज-2 तथा जेवर लिंक एक्सप्रेसवे के पैकेज-1 एवं पैकेज-2 शामिल हैं।
इन परियोजनाओं का निर्माण कार्य विकासकर्ताओं के चयन के बाद लगभग तीन वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद पांच वर्षों तक इनके अनुरक्षण की व्यवस्था की जाएगी। परियोजना के निर्माण और अनुरक्षण पर होने वाला कुल संभावित व्यय राज्य सरकार वहन करेगी। इस प्रस्ताव में केंद्र सरकार की किसी प्रकार की वित्तीय भागीदारी अपेक्षित नहीं है। विकासकर्ताओं का चयन न्यूनतम वित्तीय प्रस्ताव प्रस्तुत करने वाले निविदाकर्ताओं के आधार पर किया गया है। ईपीसी पद्धति के तहत निर्माण कार्य के साथ परियोजनाओं की निर्धारित गुणवत्ता व समयसीमा सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा।
जेवर लिंक एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट में कई मकान आ रहे हैं। इनको शिफ्ट किया जाएगा। रबूपुरा और कपना गांव की जमीन में आने वाले मकानों का यमुना प्राधिकरण पीडब्ल्यूडी से मूल्यांकन कराया है। अधिकारियों की मानें तो किसान मकान शिफ्टिंग और जमीन देने के लिए तैयार नहीं हो रहे, जिससे भूमि खरीद की प्रक्रिया थम गई है। किसानों से संवाद किया गया, लेकिन उन्होंने जमीन देने से इनकार कर दिया। इससे 33 एकड़ भूमि की खरीद पूरी नहीं हो पा रही। इसके लिए अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसका प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। उक्त जमीन पर इंटरचेंज बनेगा।




