Himachal Wildlife Board: मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने की राज्य वन्यजीव बोर्ड की 12वीं बैठक की अध्यक्षता, बंदरों की संख्या का पंचायतवार डेटा मांगा
शिमला, 24 अक्टूबर 2026। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शनिवार को शिमला में हिमाचल प्रदेश राज्य वन्यजीव बोर्ड की 12वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में औद्योगिक विकास, सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमावर्ती आधारभूत ढांचे, सड़क सुविधाओं, गैर-वानिकी कार्यों के लिए वन भूमि के उपयोग और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा की गई। इन प्रस्तावों पर विचार करते समय विकास की आवश्यकताओं, राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा को विशेष रूप से ध्यान में रखा गया। बैठक में विभिन्न परियोजनाओं को लागू वैधानिक प्रावधानों तथा पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप मंजूरी प्रदान की गई।
बैठक में कांगड़ा जिले के संसारपुर टैरेस औद्योगिक क्षेत्र के फेज-1 में प्लॉट नंबर 53 और 54 पर मैसर्स सीएमजी बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड की ओर से सक्रिय औषधि सामग्री यानी एपीआई और इंटरमीडिएट्स के निर्माण के लिए इकाई स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस परियोजना को औद्योगिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया। बोर्ड ने प्रस्ताव पर विचार करते हुए संबंधित नियमों और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं को ध्यान में रखा।
सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बैठक में कई प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। लाहौल-स्पीति जिले की स्पीति तहसील के मुहाल लालुंग और धार चोकुला, काजा में बॉर्डर आउट पोस्ट लालुंग की स्थापना के लिए रिकांगपिओ स्थित भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की 17वीं बटालियन को 1.78.20 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरित करने के प्रस्ताव पर विचार किया गया। इसके अतिरिक्त, किन्नौर जिले में फॉरवर्ड पोस्ट निथल थाच की स्थापना के लिए कुल्लू स्थित आईटीबीपी की दूसरी बटालियन के पक्ष में 1.60 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरित करने का प्रस्ताव भी बैठक में रखा गया। इन प्रस्तावों का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में आवश्यक आधारभूत ढांचे के विकास से संबंधित जरूरतों को पूरा करना है।
किन्नौर जिले की सांगला तहसील में नागस्ती के समीप उत्तरी सीमा पर सैन्य आधारभूत ढांचे के विकास का प्रस्ताव भी बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसके तहत रकछम-छितकुल वन्यजीव अभयारण्य के भीतर 00-27-50 हेक्टेयर वन भूमि 11 महार रेजिमेंट और मुख्यालय 136 स्वतंत्र इन्फैंट्री ब्रिगेड समूह के पक्ष में हस्तांतरित करने पर विचार किया गया। बैठक में सामरिक आवश्यकताओं के साथ वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा की गई।
औद्योगिक उत्पादन क्षमता बढ़ाने से संबंधित प्रस्ताव के तहत मैसर्स गोयल फर्नेस प्राइवेट लिमिटेड की मौजूदा सेकेंडरी मेटलर्जिकल इकाई के विस्तार पर भी विचार किया गया। कंपनी ने एमएस इंगोट्स की वार्षिक उत्पादन क्षमता को 19,200 टन से बढ़ाकर 96,600 टन करने का प्रस्ताव रखा है। विस्तार योजना में अतिरिक्त इंडक्शन फर्नेस, कंटीन्यूअस कास्टिंग मशीन और रोलिंग मिल स्थापित करने की बात शामिल है। इसके माध्यम से प्रतिवर्ष 77,280 टन राउंड, एंगल, चैनल, टीएमटी बार और फ्लैट्स का उत्पादन करने का प्रस्ताव है। बोर्ड ने इस परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार करते हुए निर्धारित वैधानिक प्रावधानों और पर्यावरणीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखा।
मंडी जिले के सराज वन मंडल में स्थित शिकारी देवी वन्यजीव अभयारण्य के भीतर भुलाह-शिकारी देवी सड़क के विस्तारीकरण और उन्नयन के प्रस्ताव पर भी चर्चा की गई। इस परियोजना के लिए हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के सराज मंडल के पक्ष में 4.72 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरित करने का प्रस्ताव रखा गया था। सड़क सुविधा में सुधार के साथ वन्यजीव अभयारण्य और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करने से जुड़े पहलुओं पर विचार किया गया। विस्तृत चर्चा के बाद बैठक में प्रस्तुत प्रस्तावों को लागू वैधानिक प्रावधानों तथा वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मंजूरी प्रदान की गई।
बैठक में मंडी जिले के सुकेत वन मंडल में कीरतपुर-मनाली फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग-154 के पुंग-भुवाणा टनल खंड पर सड़क दुर्घटनाओं के कारण वन्यजीवों की मौत और क्षति की बढ़ती घटनाओं को रोकने के उपायों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री और बोर्ड के सदस्यों ने वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा सड़क हादसों में उनकी जान जाने की घटनाओं को कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया। इस विषय को सड़क सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण, दोनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया।
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने वन्यजीव विंग से प्रदेश में बंदरों की संख्या का पंचायतवार आंकड़ा उपलब्ध करवाने के संबंध में जानकारी मांगी। बंदरों की संख्या से जुड़ा पंचायतवार डेटा वन्यजीव प्रबंधन और संबंधित क्षेत्रों में योजनाएं तैयार करने के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। मुख्यमंत्री ने कांगड़ा जिले के देहरा स्थित बनखंडी में निर्माणाधीन दुर्गेश अरण्य प्राणी उद्यान की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए, ताकि परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए निर्धारित कार्यों में अनावश्यक देरी न हो।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश वन विभाग के वन्यजीव विंग और हिमाचल प्रदेश डाक परिमंडल, शिमला के सहयोग से जारी दो पोस्टकार्ड श्रृंखलाओं का विमोचन किया। इन श्रृंखलाओं के नाम ‘हिमाचल्स वाइल्ड आइकॉन्स’ और ‘हिमाचल्स वाइल्ड हेरिटेज’ हैं। इनका उद्देश्य हिमाचल प्रदेश की वन्यजीव विरासत और प्राकृतिक धरोहर को सामने लाना है। मुख्यमंत्री ने प्रधान मुख्य अरण्यपाल एवं वन बल प्रमुख (हॉफ) डॉ. संजय सूद द्वारा लिखित पुस्तक ‘सिंप्लिफाइड प्रोसीजर्स फॉर एनालिसिस ऑफ फिजियो केमिकल टैस्ट्स इन वाटर सैंपल्स’ का भी विमोचन किया।
बैठक में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, हिमाचल प्रदेश योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया, विधायक संजय अवस्थी, प्रधान सचिव एम. सुधा देवी, राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य, प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन्यजीव) आलोक प्रेम नगर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में विकास परियोजनाओं, सीमावर्ती सुरक्षा, वन भूमि के उपयोग और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श के साथ बंदरों की पंचायतवार संख्या जुटाने तथा दुर्गेश अरण्य प्राणी उद्यान के निर्माण कार्य में तेजी लाने पर भी विशेष जोर दिया गया।





