Farmer Protest: यमुना प्राधिकरण का घेराव करने जा रहे किसानों को पुलिस ने रोका, महिलाओं समेत प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने का आरोप
ग्रेटर नोएडा में बुधवार को जमीन के मुआवजे और अन्य लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन करने जा रहे किसानों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बन गई। किसान यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) कार्यालय पहुंचकर धरना देना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने प्राधिकरण से करीब एक किलोमीटर पहले एफएनजी मॉल के सामने ही उन्हें रोक दिया। इस दौरान धक्का-मुक्की हुई और प्रदर्शन कर रहे किसानों को पुलिस द्वारा उठाकर वाहनों में बैठाने का आरोप सामने आया। किसानों का कहना है कि पुलिस ने महिलाओं और पुरुषों को घसीटकर वैन में डाला और कई लोगों को हिरासत में ले लिया। किसान अपनी जमीन के बदले 10 प्रतिशत विकसित आबादी भूखंड, 64 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा और आबादी से जुड़े लंबित मामलों के समाधान की मांग कर रहे हैं।
किसान नेताओं सुखबीर खलीफा और डॉ. रुपेश वर्मा ने बताया कि किसान लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर प्राधिकरण और संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक ठोस समाधान नहीं मिला है। किसानों के मुताबिक, जमीन अधिग्रहण के बाद मिलने वाले 10 प्रतिशत विकसित भूखंड और 64 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे से जुड़े कई मामले अब भी लंबित हैं। आबादी से संबंधित मामलों का निस्तारण नहीं होने के कारण भी किसानों में नाराजगी है। इन्हीं मांगों को लेकर बुधवार को प्राधिकरण कार्यालय पर धरना देने की घोषणा की गई थी। किसान अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचाना चाहते थे, लेकिन उन्हें कार्यालय तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की बात कही गई, हालांकि हिरासत में लिए गए कुल लोगों की संख्या और उन्हें कहां रखा गया, इसकी तत्काल स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी।
इस आंदोलन की तैयारी के लिए आठ अक्टूबर को सेक्टर-144 में पेमे चौहान के आवास पर किसान संघर्ष मोर्चा की बैठक हुई थी। बैठक में विभिन्न किसान संगठनों के नेताओं ने निर्णय लिया था कि 10 प्रतिशत विकसित भूखंड सहित किसानों की प्रमुख मांगों को लेकर 21 अक्टूबर से यमुना प्राधिकरण कार्यालय पर अनिश्चितकालीन महापड़ाव शुरू किया जाएगा। किसान नेताओं ने तय किया था कि जब तक उनकी मांगों का ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। किसान संघर्ष मोर्चा के वरिष्ठ नेता सुखबीर खलीफा के मुताबिक, मोर्चा 17 जुलाई से लगातार आंदोलन कर रहा है। इसके बाद 17 अगस्त को भी आंदोलन किया गया और नौ से 16 सितंबर तक प्रदर्शन जारी रहा। इन आंदोलनों के दौरान किसानों ने गिरफ्तारियां भी दीं। तीनों विकास प्राधिकरणों के अधिकारियों के साथ कई दौर की वार्ताएं हुईं, लेकिन 10 प्रतिशत विकसित भूखंड की मांग पर अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया।
किसान एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और किसान संघर्ष मोर्चा के नेता सोरन प्रधान ने आरोप लगाया कि पुलिस कमिश्नर और प्राधिकरण के अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया था कि पांच अक्टूबर तक शासन स्तर पर 10 प्रतिशत विकसित भूखंड के मुद्दे पर वार्ता कराई जाएगी। किसानों के अनुसार, तय समय बीत जाने के बावजूद बातचीत नहीं कराई गई, जिससे आंदोलनकारियों में नाराजगी बढ़ गई। किसान सभा के जिलाध्यक्ष और किसान संघर्ष मोर्चा के नेता डॉ. रुपेश वर्मा ने बताया कि वर्ष 2023 में 124 दिनों तक चले धरने के बाद तीनों प्राधिकरणों ने 10 प्रतिशत विकसित भूखंड देने से संबंधित प्रस्ताव शासन की मंजूरी के लिए भेजा था। हालांकि, उनके मुताबिक प्रस्ताव को अब तक शासन से मंजूरी नहीं मिली है। वर्ष 2024 में भी बड़ी संख्या में किसानों ने गिरफ्तारी दी और आंदोलन जारी रखा, लेकिन उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ।
दूसरी ओर, पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू है। पुलिस के अनुसार, करीब 30 से 35 लोग बिना अनुमति धरना-प्रदर्शन के लिए एकत्र हुए थे। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया गया। वहीं, किसान नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। किसानों की मांग है कि लंबित मुआवजे और आबादी भूखंड के मामलों का समाधान किया जाए तथा प्राधिकरण और शासन स्तर पर स्पष्ट निर्णय लिया जाए। फिलहाल, इस घटनाक्रम के बाद किसानों और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है।




