Sikh Heritage: अकाल तख्त जत्थेदार ने मरियम नवाज को लिखी चिट्ठी, लाहौर के ऐतिहासिक सिख स्थलों की सुरक्षा की मांग

Sikh Heritage: अकाल तख्त जत्थेदार ने मरियम नवाज को लिखी चिट्ठी, लाहौर के ऐतिहासिक सिख स्थलों की सुरक्षा की मांग

अमृतसर। श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ को पत्र लिखकर लाहौर के पुराने शहर में स्थित सिख इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और विरासती स्थलों की सुरक्षा तथा संरक्षण की मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से लाल कुआं और कट्टरी चंदू से जुड़े स्थलों की मौजूदा स्थिति की आधिकारिक जांच कराने की मांग उठाई है।

ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज के अनुसार, लाल कुआं और कट्टरी चंदू का संबंध सिख इतिहास और गुरु अर्जन देव जी की शहादत से जुड़ी स्मृतियों से है। इन स्थलों को लेकर सिख समुदाय की ओर से चिंता जताई गई थी। पत्र में कहा गया है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित स्थलों की स्थिति और वहां चल रही गतिविधियों की तथ्यात्मक जांच कराई जानी चाहिए।

जत्थेदार ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि उनकी चिट्ठी का उद्देश्य पाकिस्तान की किसी सरकार, संस्था या किसी व्यक्ति पर आरोप लगाना नहीं है। उन्होंने कहा कि लाहौर की ऐतिहासिक विरासत और सिख इतिहास से जुड़े स्थानों के संरक्षण की ओर ध्यान दिलाना जरूरी है, ताकि बचे हुए ऐतिहासिक अवशेष आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रह सकें।

पत्र में पाकिस्तान के पंजाब सरकार से लाल कुआं और कट्टरी चंदू की वर्तमान स्थिति की तुरंत जांच कराने का आग्रह किया गया है। साथ ही कहा गया है कि यदि इन स्थलों पर किसी प्रकार का निर्माण, बदलाव या अन्य गतिविधि चल रही हो तो जांच पूरी होने तक उसे रोक दिया जाए। इसके पीछे उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी ऐतिहासिक स्थल की संरचना या उसकी पहचान जांच के दौरान प्रभावित न हो।

जत्थेदार ने ऐतिहासिक और पुरातात्विक विशेषज्ञों की मदद से इन स्थलों की विरासती महत्ता की जांच कराने का सुझाव भी दिया है। इसके लिए वॉल्ड सिटी ऑफ लाहौर अथॉरिटी, पुरातत्व विभाग और संबंधित अन्य विभागों के विशेषज्ञों को प्रक्रिया में शामिल करने की बात कही गई है। इसके साथ ही सिख इतिहास के विशेषज्ञों और पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रतिनिधियों को भी जांच प्रक्रिया का हिस्सा बनाने की मांग की गई है।

पत्र में केवल दो स्थलों तक सीमित रहने के बजाय लाहौर के पुराने शहर में सिख इतिहास से जुड़े सभी प्रमुख स्थानों का व्यापक विरासती सर्वेक्षण कराने की मांग भी की गई है। जत्थेदार के अनुसार, इस सर्वेक्षण में प्रत्येक स्थल की मौजूदा स्थिति, ऐतिहासिक महत्व, स्वामित्व और कानूनी स्थिति का रिकॉर्ड तैयार किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समय के साथ शहरी विकास, भारत-पाकिस्तान विभाजन और दूसरी ऐतिहासिक परिस्थितियों के कारण अनेक पुराने निशान या तो समाप्त हो गए हैं या उनका मूल स्वरूप बदल गया है। ऐसे में जो अवशेष अभी मौजूद हैं, उनका महत्व और बढ़ जाता है। उनका कहना है कि किसी ऐतिहासिक स्थल की अहमियत केवल उसके बचे हुए भौतिक ढांचे से नहीं, बल्कि उससे जुड़ी ऐतिहासिक स्मृति और विरासत से भी तय होती है।

जत्थेदार ने पाकिस्तान पंजाब सरकार की ओर से ऐतिहासिक गुरुद्वारों के संरक्षण और उन्हें दोबारा खोलने के लिए विशेष बजट दिए जाने की पहल का भी उल्लेख किया और उसका स्वागत किया। साथ ही उन्होंने कहा कि विरासत संरक्षण के ऐसे प्रयास उसी भावना के साथ आगे बढ़ाए जाने चाहिए, जिसके उद्देश्य से उन्हें शुरू किया गया है।

पत्र की एक प्रति पाकिस्तान पंजाब सरकार के प्रांतीय मंत्री और पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष रमेश सिंह अरोड़ा को भी भेजी गई है। जत्थेदार ने जांच और आगे की कार्रवाई में सिख संस्थाओं तथा इतिहास के जानकारों को शामिल करने पर जोर दिया है।

ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने उम्मीद जताई है कि पाकिस्तान पंजाब सरकार इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई शुरू करेगी। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि जांच के बाद उठाए गए कदमों और कार्रवाई की जानकारी सिख संगत, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और श्री अकाल तख्त साहिब के साथ साझा की जाए।

यह पूरा मामला लाहौर में मौजूद सिख ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखने की मांग से जुड़ा है। अकाल तख्त की ओर से उठाई गई मांग में किसी व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगाने के बजाय पहले तथ्यात्मक जांच, ऐतिहासिक महत्व का आकलन और उसके बाद संरक्षण की प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया गया है।

फिलहाल मरियम नवाज को भेजे गए इस पत्र में लाहौर के ऐतिहासिक सिख स्थलों की स्थिति की जांच, संभावित निर्माण या बदलाव पर अस्थायी रोक, विशेषज्ञों की भागीदारी और व्यापक विरासती सर्वेक्षण की मांग की गई है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि पाकिस्तान पंजाब सरकार इन मांगों पर क्या कदम उठाती है और संबंधित स्थलों के संरक्षण को लेकर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है।

 

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