Kidnapping Case: कॉलेज छात्रा के अपहरण में दोषी को छह साल की कैद, 23 हजार रुपये का जुर्माना
नोएडा। कॉलेज छात्रा के अपहरण और छेड़छाड़ से जुड़े करीब 11 साल पुराने मामले में अदालत ने बिजनौर निवासी कपिल को दोषी करार देते हुए छह वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश आशीष कुमार चौरसिया की अदालत ने दोषी पर 23 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना जमा नहीं करने पर उसे एक महीने की अतिरिक्त कैद काटनी होगी।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता अपराध नितिन त्यागी के मुताबिक मामला नवंबर 2015 का है। पीड़िता के पिता ने 20 नवंबर 2015 को सेक्टर-39 थाना पुलिस को शिकायत दी थी कि उनकी बेटी 19 नवंबर की सुबह एक डिग्री कॉलेज में पढ़ने के लिए घर से निकली थी, लेकिन शाम तक वापस नहीं लौटी।
परिवार ने छात्रा की तलाश के लिए कॉलेज परिसर और आसपास के इलाकों में काफी खोजबीन की। परिचितों से भी जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। इसके बाद परिजनों ने अपहरण की आशंका जताते हुए पुलिस को तहरीर दी। पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान कपिल की भूमिका सामने आई। पुलिस ने कपिल के साथ घटना के समय नाबालिग रहे एक अन्य आरोपी को भी मामले में शामिल करते हुए आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया था। हालांकि, 13 जून 2018 को तत्कालीन पीठासीन अधिकारी ने दूसरे आरोपी की उम्र को देखते हुए उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड को स्थानांतरित कर दिया। इसके बाद अदालत में कपिल के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई जारी रही।
अभियोजन पक्ष ने सुनवाई के दौरान चार गवाहों के बयान अदालत में दर्ज कराए। पीड़िता ने न्यायालय को बताया कि कॉलेज से घर लौटने के दौरान वह सेक्टर-71 चौराहे पर पहुंची थी। यहां पहले से परिचित कपिल ने कथित तौर पर उसे जबरन कार में बैठा लिया और देहरादून ले गया।
पीड़िता के बयान के अनुसार वह करीब एक सप्ताह तक देहरादून में रही। 26 नवंबर 2015 को आरोपी उसे वापस लेकर आ रहा था। इसी दौरान रास्ते में पुलिस ने दोनों को पकड़ लिया और पीड़िता को बरामद कर लिया।
अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और पीड़िता के बयान के आधार पर अपहरण से जुड़े आरोप को प्रमाणित माना। हालांकि, मामले में लगाए गए सभी आरोप अदालत में साबित नहीं हो सके।
न्यायालय ने दुष्कर्म के आरोप से संबंधित बयानों में गंभीर विसंगतियां पाईं। पीड़िता की ओर से स्वयं दुष्कर्म का उल्लेख नहीं किए जाने समेत उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए अदालत ने माना कि अभियोजन इस आरोप को संदेह से परे साबित नहीं कर पाया।
इसी तरह नशीला पदार्थ सुंघाकर बेहोश करने के आरोप से संबंधित बयानों में भी विरोधाभास सामने आया। पर्याप्त प्रमाण नहीं मिलने के कारण अदालत ने कपिल को इस आरोप से बरी कर दिया।
सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद अदालत ने कपिल को अपहरण से संबंधित धारा-366 के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने उसे छह वर्ष के कारावास की सजा सुनाने के साथ 23 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।





