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Noida Unsafe Buildings: जर्जर मकानों पर प्राधिकरण का शिकंजा, सदरपुर से ममूरा तक सर्वे; सेक्टर-31 के 128 EWS फ्लैट भी निशाने पर

Noida Unsafe Buildings: जर्जर मकानों पर प्राधिकरण का शिकंजा, सदरपुर से ममूरा तक सर्वे; सेक्टर-31 के 128 EWS फ्लैट भी निशाने पर

नोएडा। दिल्ली में हुए हालिया इमारत हादसे के बाद नोएडा प्राधिकरण ने शहर के गांवों और सेक्टरों में जर्जर तथा असुरक्षित भवनों को लेकर कार्रवाई तेज कर दी है। प्राधिकरण की टीमें अलग-अलग इलाकों में सर्वे कर खतरनाक भवनों की पहचान कर रही हैं। जिन मकानों की स्थिति रहने योग्य नहीं पाई जा रही है, वहां नोटिस चस्पा कर भवन खाली करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। मकान मालिकों और वहां रहने वाले लोगों को भवन खाली करने के लिए एक से दो सप्ताह तक का समय दिया जा रहा है।

प्राधिकरण ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय के भीतर भवन खाली नहीं किया गया और वहां रहने के दौरान किसी प्रकार का हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की होगी। प्राधिकरण का कहना है कि इस बार अभियान केवल नोटिस जारी करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गंभीर रूप से जर्जर भवनों को खाली कराने की कार्रवाई भी की जाएगी।

नोएडा प्राधिकरण की एसीईओ वंदना त्रिपाठी के मुताबिक जिन भवनों पर नोटिस लगाए जा रहे हैं, उन्हें सुरक्षा को देखते हुए खाली कराया जाएगा। नोटिस की एक प्रति संबंधित पुलिस को भी उपलब्ध कराई जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर पुलिस की सहायता लेकर खतरनाक भवनों को खाली कराया जाएगा, ताकि वहां रह रहे लोगों को किसी संभावित हादसे से बचाया जा सके।

नोएडा प्राधिकरण का क्षेत्र 10 वर्क सर्किल में विभाजित है और इनके अंतर्गत कुल 81 गांव आते हैं। सभी वर्क सर्किल अधिकारियों को अपने क्षेत्र में जर्जर और असुरक्षित भवनों की पहचान करने तथा आवश्यक कार्रवाई करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके बाद अलग-अलग गांवों में टीमें मौके पर पहुंचकर भवनों की स्थिति का आकलन कर रही हैं।

अभियान के तहत सदरपुर, निठारी, ममूरा, सलारपुर और भंगेल सहित घनी आबादी वाले क्षेत्रों में विशेष रूप से सर्वे किया जा रहा है। इन इलाकों में पुराने और जर्जर भवनों के साथ ऐसे निर्माण भी जांच के दायरे में हैं, जिनकी स्थिति लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।

ममूरा गांव में अब तक नौ भवनों को जर्जर पाए जाने के बाद नोटिस चस्पा किए जा चुके हैं। चिंता की बात यह है कि इन भवनों में अभी भी लोग रह रहे हैं। प्राधिकरण ने नोटिस के माध्यम से उन्हें भवन खाली करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि तय समय के बाद भी भवन खाली नहीं किए जाने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

नोएडा में जर्जर भवनों की समस्या नई नहीं है। प्राधिकरण ने वर्ष 2019 से पहले भी बड़े स्तर पर सर्वे कराया था। उस दौरान करीब 1,757 इमारतों को असुरक्षित चिह्नित किया गया था और संबंधित भवन मालिकों को नोटिस जारी किए गए थे। हालांकि इसके बाद इन भवनों के खिलाफ अपेक्षित स्तर पर प्रभावी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी थी।

इस बार प्राधिकरण ने पुराने अनुभव को देखते हुए अभियान को अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी की है। अधिकारियों के मुताबिक केवल भवनों की पहचान और नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं होगा। जिन इमारतों से लोगों की जान को खतरा है, उन्हें खाली कराने पर भी जोर दिया जाएगा।

गांवों के साथ प्राधिकरण की नजर आवासीय सेक्टरों के पुराने भवनों पर भी है। सेक्टर-31 में स्थित 128 EWS फ्लैट जर्जर स्थिति में पाए जाने के कारण पहले ही नोटिस के दायरे में आ चुके हैं। इन फ्लैटों की स्थिति को देखते हुए आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया भी चल रही है।

नए सर्वे में निठारी सहित अन्य इलाकों में असुरक्षित मकानों की पहचान की जा रही है। गांवों में सर्वे पूरा होने के बाद प्राधिकरण सेक्टरों में भी व्यापक अभियान चलाने की तैयारी में है। इस दौरान भवनों की संरचनात्मक स्थिति के साथ स्वीकृत नक्शे के विपरीत किए गए निर्माण की भी जांच की जाएगी।

प्राधिकरण को कई स्थानों पर निर्धारित मानकों के विपरीत चार से पांच मंजिल तक निर्माण किए जाने की शिकायतें मिली हैं। ऐसे भवन भी जांच के दायरे में आएंगे। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित भवन मालिकों के खिलाफ धारा-10 के तहत नोटिस जारी कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

प्राधिकरण का उद्देश्य जर्जर और खतरनाक भवनों की समय रहते पहचान कर संभावित दुर्घटनाओं को रोकना है। सर्वे के बाद तैयार होने वाली सूची के आधार पर असुरक्षित इमारतों के खिलाफ चरणबद्ध कार्रवाई की जाएगी।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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