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FMGE Exam: मानकों पर सख्ती बरकरार, छात्रों की चिंताओं पर भी सुनवाई; साल में तीन बार परीक्षा कराने पर विचार

FMGE Exam: मानकों पर सख्ती बरकरार, छात्रों की चिंताओं पर भी सुनवाई; साल में तीन बार परीक्षा कराने पर विचार

नई दिल्ली, 26 अगस्त। विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट परीक्षा (FMGE) के मानकों में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी, लेकिन परीक्षार्थियों की वास्तविक और उचित शिकायतों के समाधान के लिए व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने पर विचार किया जा रहा है। आयुर्विज्ञान में राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (NBEMS) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि भारत में चिकित्सा सेवा के लिए आवश्यक न्यूनतम दक्षता के मानकों से समझौता नहीं किया जा सकता।

जून 2026 की एफएमजीई को लेकर जारी विरोध और अभ्यर्थियों की ओर से उठाए गए सवालों के बीच विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें सामने आई हैं। इन सिफारिशों में परीक्षा की पारदर्शिता बढ़ाने, अभ्यर्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और साल में परीक्षा के अवसर बढ़ाने जैसे कई महत्वपूर्ण सुझाव शामिल हैं।

एयर मार्शल (डॉ.) पवन कपूर (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने एफएमजीई को साल में तीन बार आयोजित करने की व्यवहार्यता पर विचार करने का सुझाव दिया है। मौजूदा व्यवस्था में बदलाव होने पर विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स को परीक्षा में शामिल होने के अधिक अवसर मिल सकते हैं।

समिति ने परीक्षा शुल्क की समीक्षा करने की भी सिफारिश की है। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों पर आधारभूत सुविधाओं को बेहतर करने की जरूरत बताई गई है, ताकि अभ्यर्थियों को परीक्षा के दौरान तकनीकी या व्यवस्थागत परेशानियों का सामना न करना पड़े।

पारदर्शिता बढ़ाने के लिए समिति की एक महत्वपूर्ण सिफारिश अभ्यर्थियों को उनके रिकॉर्डेड उत्तर देखने की सुविधा उपलब्ध कराने से जुड़ी है। हालांकि, इसके लिए तकनीकी और कानूनी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही गई है। यदि इसे लागू किया जाता है तो परीक्षार्थी अपने रिकॉर्ड किए गए उत्तरों को देख सकेंगे और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उनकी कई आशंकाओं को दूर करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, समिति ने जून 2026 की एफएमजीई में अभ्यर्थियों को ग्रेस या क्षतिपूरक अंक देने की सिफारिश नहीं की है। समिति को जांच के दौरान ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि वीडियो आधारित प्रश्नों या प्रश्नपत्र की समग्र कठिनाई के कारण परीक्षा परिणाम असामान्य रूप से प्रभावित हुआ।

एफएमजीई के परिणामों से जुड़े आंकड़ों ने भी इस बहस को नया संदर्भ दिया है। जून 2026 की परीक्षा में पहली बार शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की सफलता दर 35.74 प्रतिशत रही। दूसरी बार परीक्षा देने वालों में 21.45 प्रतिशत अभ्यर्थी सफल हुए। वहीं, पांच से अधिक प्रयास कर चुके अभ्यर्थियों की सफलता दर महज 3.29 प्रतिशत रही।

दिसंबर 2025 की परीक्षा में भी प्रयासों की संख्या के आधार पर सफलता दर में बड़ा अंतर देखने को मिला था। उस परीक्षा में पहली बार शामिल होने वाले 47.53 प्रतिशत अभ्यर्थी सफल हुए थे, जबकि पांच से अधिक प्रयास कर चुके अभ्यर्थियों में सफलता दर केवल 5.58 प्रतिशत रही थी।

विशेषज्ञ समिति ने प्रश्नपत्र की कठिनाई के स्तर को लेकर भी एक संरचित व्यवस्था का सुझाव दिया है। समिति के मुताबिक प्रश्नपत्र में करीब 30 प्रतिशत आसान, 50 प्रतिशत मध्यम और 20 प्रतिशत कठिन प्रश्न होने चाहिए। इसके साथ ही औसत कठिनाई स्तर को 5.5 से अधिक नहीं रखने का सुझाव दिया गया है।

अधिकारियों का कहना है कि एफएमजीई को सामान्य प्रवेश परीक्षा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह विदेश से चिकित्सा शिक्षा हासिल करने वाले भारतीय नागरिकों और ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया के लिए भारत में चिकित्सा अभ्यास से पहले आवश्यक योग्यता की जांच करने वाली स्क्रीनिंग परीक्षा है।

इसका प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत में मरीजों का इलाज करने वाले चिकित्सकों के पास निर्धारित न्यूनतम चिकित्सा ज्ञान और दक्षता हो। इसी कारण परीक्षा के मूल मानकों को कमजोर करने के बजाय अभ्यर्थियों की जायज चिंताओं, पारदर्शिता, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था और परीक्षा अवसरों जैसे पहलुओं में सुधार पर जोर दिया जा रहा है।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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