Liver Disease: लिवर की बीमारी की जांच में AI का बढ़ेगा दखल, डिजिटल पैथोलॉजी से निदान में आएगी तेजी

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Liver Disease: लिवर की बीमारी की जांच में AI का बढ़ेगा दखल, डिजिटल पैथोलॉजी से निदान में आएगी तेजी

नई दिल्ली, 10 अगस्त: लिवर, पित्त की नली और अग्न्याशय से जुड़ी बीमारियों की जांच और निदान को अधिक सटीक और तेज बनाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल पैथोलॉजी की भूमिका आने वाले समय में और बढ़ सकती है। इसी संभावनाओं पर विशेषज्ञों ने नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बायलरी साइंसेज (आईएलबीएस) में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान विस्तार से चर्चा की।

आईएलबीएस में 7 से 9 अगस्त तक हेपेटो-पैंक्रिएटो-बिलियरी (एचपीबी) पैथोलॉजी पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें देश और विदेश से पहुंचे विशेषज्ञों ने लिवर, बाइलरी ट्रैक्ट और पैंक्रियाज से जुड़ी बीमारियों की आधुनिक जांच तकनीकों पर विचार-विमर्श किया। कार्यशाला में डिजिटल पैथोलॉजी, होल-स्लाइड इमेजिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्लीनिकल इस्तेमाल को प्रमुखता से शामिल किया गया।

विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल पैथोलॉजी के जरिए पैथोलॉजी स्लाइड को डिजिटल रूप में स्कैन कर उनका विस्तृत विश्लेषण किया जा सकता है। इससे विशेषज्ञों को जटिल मामलों में जांच के दौरान अधिक जानकारी उपलब्ध हो सकती है। वहीं, एआई आधारित तकनीक बड़ी मात्रा में मेडिकल इमेज और पैटर्न का विश्लेषण करने में मदद कर सकती है।

कार्यशाला में डिजिटल स्कैनर वर्कफ्लो और एआई की बुनियादी जानकारी से लेकर हेपेटिक और कोलेस्टेटिक पैथोलॉजी, बाइलरी-पैंक्रियाटिक ट्यूमर, एचपीबी साइटोलॉजी, लिवर ट्यूमर और ट्रांसप्लांट पैथोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए।

कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण 15वीं डॉ. वी. रामालिंगस्वामी ऑरेशन रहा। यह व्याख्यान सिंगापुर के नेशनल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल की डॉ. ग्वेनेथ सून ने दिया। उन्होंने एमएएसएलडी और एमएएसएच की ग्रेडिंग तथा स्टेजिंग में एआई आधारित डिजिटल पैथोलॉजी की संभावित भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि आधुनिक डिजिटल तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। इमेज जे/फिजी और गूगल कोलाब जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से होल-स्लाइड इमेजिंग और एआई टूल्स के इस्तेमाल की जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य विशेषज्ञों और प्रतिभागियों को भविष्य में पैथोलॉजी के क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली तकनीकों के लिए तैयार करना था।

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल पैथोलॉजी और एआई के बेहतर इस्तेमाल से बीमारी की पहचान और निदान की सटीकता में सुधार किया जा सकता है। इसके साथ ही मेडिकल रिसर्च को भी नई गति मिल सकती है। तकनीक के विस्तार से जटिल मामलों में विशेषज्ञों के बीच सहयोग और डिजिटल स्तर पर जांच की प्रक्रिया को भी मजबूत किया जा सकता है।

हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि एआई चिकित्सा विशेषज्ञों का विकल्प नहीं बल्कि उनकी सहायता करने वाली तकनीक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके प्रभावी इस्तेमाल के लिए उच्च गुणवत्ता वाले डेटा, प्रशिक्षित विशेषज्ञों और मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी। आने वाले समय में एआई और डिजिटल पैथोलॉजी का क्लीनिकल इस्तेमाल बढ़ने के साथ लिवर और एचपीबी रोगों की जांच में इसके प्रभाव को और बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।