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Consumer Court: बीमा क्लेम विवाद में तकनीकी चूक से उपभोक्ता की शिकायत खारिज, चार साल बाद नहीं मिली राहत

Noida NCR News in Hindi

Consumer Court: बीमा क्लेम विवाद में तकनीकी चूक से उपभोक्ता की शिकायत खारिज, चार साल बाद नहीं मिली राहत

नोएडा के सेक्टर-49 निवासी करमवीर चौधरी को मोबाइल खराब होने के बाद बीमा क्लेम नहीं मिलने के मामले में चार साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद भी राहत नहीं मिल सकी। जिला उपभोक्ता आयोग ने तकनीकी गलती के आधार पर उनकी शिकायत खारिज कर दी। आयोग ने पाया कि जिस बीमा कंपनी से क्लेम को लेकर विवाद था, उसे ही मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया था। मामला वर्ष 2019 का है, जब करमवीर चौधरी ने 14 जून को नोएडा स्थित नीरू इंटरप्राइजेज से सैमसंग ए-30 मोबाइल खरीदा था। मोबाइल खरीदने के दौरान दुकानदार ने उन्हें फोन का बीमा कराने की सलाह दी थी। इसके बाद उन्होंने बजाज इंश्योरेंस कंपनी से मोबाइल का बीमा कराया था। उन्हें भरोसा था कि फोन खराब होने या किसी नुकसान की स्थिति में बीमा कंपनी से भरपाई मिल जाएगी। कुछ समय बाद मोबाइल में खराबी आ गई। करमवीर का आरोप था कि उन्होंने बीमा क्लेम लेने के लिए कई बार प्रयास किए, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। कभी उन्हें क्लेम फॉर्म भरने के लिए कहा गया तो कभी टोल फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई। कई बार संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद करमवीर ने अपने खर्च पर मोबाइल की मरम्मत कराई और मरम्मत का बिल जमा कर बीमा राशि की मांग की, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। इससे परेशान होकर उन्होंने वर्ष 2020 में जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने बजाज फाइनेंस कंपनी प्राइवेट लिमिटेड और नीरू इंटरप्राइजेज को पक्षकार बनाया था। उन्होंने मानसिक उत्पीड़न, मोबाइल मरम्मत खर्च और मुकदमे के खर्च के साथ मुआवजे की मांग की थी। उनका कहना था कि बीमा कराने के बावजूद उन्हें सुविधा का लाभ नहीं मिला। मामले की सुनवाई के दौरान बजाज फाइनेंस कंपनी ने आयोग के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उसका काम केवल ऋण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। बीमा क्लेम से उसका कोई सीधा संबंध नहीं है। कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि जिस बीमा कंपनी से क्लेम को लेकर विवाद था, उसे ही शिकायत में पक्षकार नहीं बनाया गया। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजू शर्मा की पीठ ने सुनवाई के बाद पाया कि मामले का मुख्य विवाद बीमा क्लेम से जुड़ा हुआ था। लेकिन संबंधित बीमा कंपनी को शिकायत में शामिल नहीं किया गया था। आयोग ने माना कि आवश्यक पक्षकार के बिना शिकायतकर्ता अपने दावे को प्रभावी रूप से साबित नहीं कर सका। आयोग ने 11 जून को करमवीर चौधरी की शिकायत खारिज कर दी। साथ ही दोनों पक्षों को अपने-अपने खर्च स्वयं वहन करने के निर्देश दिए गए। आयोग ने स्पष्ट किया कि जिस कंपनी से बीमा क्लेम मांगा जा रहा था, उसे मामले में शामिल करना जरूरी था। तकनीकी कमी के कारण उपभोक्ता को चार साल चली लड़ाई के बाद भी राहत नहीं मिल पाई।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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