Motherson Violence Case: मदरसन हिंसा मामले में आरोपी अतुल को नहीं मिली राहत, अदालत ने जमानत याचिका की खारिज

Motherson Violence Case: मदरसन हिंसा मामले में आरोपी अतुल को नहीं मिली राहत, अदालत ने जमानत याचिका की खारिज
नोएडा। मदरसन कंपनी परिसर में श्रमिक हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ और पुलिस पर हमले के चर्चित मामले में आरोपी अतुल को अदालत से बड़ा झटका लगा है। न्यायालय ने उसकी जमानत याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि केस डायरी में उपलब्ध साक्ष्य आरोपी की घटना में प्रथम दृष्टया संलिप्तता दर्शाते हैं। अदालत ने कहा कि मामले की गंभीरता और उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए आरोपी को जमानत पर रिहा किए जाने का कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता। यह मामला थाना फेज-2 क्षेत्र में दर्ज किया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार 13 अप्रैल को मदरसन कंपनी परिसर के बाहर बड़ी संख्या में श्रमिक और अन्य लोग एकत्रित हुए थे। प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने कंपनी का मुख्य गेट तोड़कर जबरन परिसर में प्रवेश किया और वहां व्यापक स्तर पर तोड़फोड़ की। आरोप है कि उपद्रवियों ने सीसीटीवी कैमरों, रिसेप्शन क्षेत्र के शीशों और रेलिंग को नुकसान पहुंचाया। इसके अलावा कंपनी कर्मचारियों और मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की गई तथा उन पर पथराव भी किया गया। अभियोजन के अनुसार हिंसा यहीं नहीं रुकी, बल्कि उपद्रवियों ने सड़क जाम कर कंपनी, पुलिस और आम जनता के वाहनों को भी निशाना बनाया। कई वाहनों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हुआ और क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। वहीं जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि अतुल मदरसन कंपनी का कर्मचारी नहीं है और न ही वह वेतन वृद्धि, ओवरटाइम अथवा बोनस की मांग को लेकर किए गए प्रदर्शन का हिस्सा था। बचाव पक्ष का कहना था कि घटना के समय वह केवल वहां से गुजर रहा था, लेकिन पुलिस ने उसे पकड़कर मामले में फंसा दिया। हालांकि अदालत के समक्ष प्रस्तुत केस डायरी और जांच से जुड़े दस्तावेजों में वादी राजेश कुमार सहित अन्य गवाहों के बयान दर्ज थे, जिनमें भीड़ द्वारा कंपनी परिसर में तोड़फोड़, आगजनी और पुलिस पर हमले की पुष्टि की गई है। उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने माना कि यह मामला सामूहिक हिंसा और औद्योगिक क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाला गंभीर प्रकरण है। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी अतुल की जमानत याचिका खारिज कर दी।





