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New Delhi : पीएम मोदी ने एक और रिकॉर्ड बनाया

New Delhi : रिकॉर्ड बनते ही टूटने के लिए हैं । आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में चुने हुए प्रधानमंत्री के रूप में सर्वाधिक दिन तक सत्ता के शिखर पर रहने का रिकॉर्ड बना लिया । आज प्रधानमंत्री मोदी ने 4399 दिन तक लगातार प्रधानमंत्री के पद पर कार्य करते हुए भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 4398 दिन तक कार्यकाल का रिकॉर्ड तोड़ दिया ।

आज का मौक़ा भारत के लोकतंत्र में गौरान्वित होने का है लेकिन विडंबना यह है की जब पूरा भारत राष्ट्र इसकी ख़ुशी मना रहा है, समस्त विश्व से मोदी जी को इस उपलब्धि की बधाइयाँ आ रही हैं तब राहुल गांधी के नेतृत्व में पूरा इंडी गठबंधन मोदी जी कि इस उपलब्धि पर रुदाली कर रहा है। तरह तरह की अनर्गल बातें कर रहा है।

भारत जैसे विश्व की सर्वाधिक आबादी वाले विशाल लोकतंत्र के लिए बारह साल अनवरत सत्ता में रहना और ईश्वर जानता है अभी कितने वर्ष और मोदी जी राष्ट्र की सेवा करते हुए कितने और रिकॉर्ड बनायेंगे ।

यह सब कुछ ऐसे ही नहीं हो गया । इसके पीछे मोदी जी का राष्ट्र के प्रति सम्पूर्ण समर्पण, तपस्या, भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की एकनिष्ठ प्रतिज्ञा, सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास का मूलमंत्र है। बिना एक दिन की छुट्टी के लगातार राष्ट्र की सेवा, कोई रविवार, होली , दिवाली या अन्य त्यौहार पर भी काम और सिर्फ़ काम । ईश्वर की ऐसी दैवीय कृपा की एक दिन जुकाम खांसी की भी छुट्टी नहीं ली।

राहुल गांधी और इंडी गठबंधन की अर्धविक्षिप्तता और राजनैतिक अपरिविक्तता का इसी से पता लगता है कि जब और राष्ट्र इस अवसर पर ख़ुशी मना रहा है तब विपक्षी दल नक्कार खाने में मोदी विरोध की तूती बजा रहे हैं।

विपक्षी रुदाली करते हुए यह भी नहीं सोच रहे की मोदी जी के नेतृत्व में एनडीए ने ना केवल केंद्र में तीसरी बार सरकार बनायी बल्कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को पटकनी देते हुए 22 राज्यों में एनडीए की सरकारें बनायी है। जनता बहुत समझदार होती है और यदि वह भाजपा और एनडीए को बारम्बार उनकी सेवा का मौक़ा दे रही है तो कुछ तो मोदी उनके लिये सही कर रहे हैं।

आज राहुल गांधी और उनके भक्त जो मोदी को कोस रहे हैं उन्हें कांग्रेस के इतिहास जिसने भारत में सर्वाधिक सत्ता का सुख भोगा उस पर ध्यान देना चाहिए । चीन जो भारत की आज़ादी के बाद में 1 अक्टूबर,1949 को स्वतंत्रता प्राप्त की थी आज विकसित राष्ट्र में दूसरे नंबर पर है । आज़ादी के समय चीन की जीडीपी 12.3 बिलियन डॉलर थी और आज चीन की अर्थव्यवस्था 17 ट्रिलियन डॉलर के साथ विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। आज़ादी के समय भारत की अर्थव्यवस्था चीन से अधिक 27 बिलियन डॉलर थी जो जब कांग्रेस को जनता ने 2014 में सत्ताच्युत किया तो हमारी जीडीपी केवल 2 ट्रिलियन डॉलर थी जिसे मोदी कार्यकाल के बारह वर्ष में 4.15 ट्रिलियन पर पहुंचा दिया है । मोदी जिन्होंने संकल्प लिया है की भारत की स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनायेंगे । इसके लिए वह पूरी शिद्दत के साथ जुड़े है। कांग्रेस को यह भी सोचना चाहिए कि नेहरू जी ने कश्मीर समस्या भारत की झोली में डाली, भारत का बंटवारा करवाया, चीन को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को मिल रही सीट दक्षिणा में दे दी, भारत की सैन्य शक्ति को मजबूत नहीं होने दिया । इसके विपरीत मोदीजी ने देश को विकास का मूलमंत्र दिया, विश्व में भारत की प्रतिष्ठा को बढ़ाया । ग़रीबी उन्मूलन का सिर्फ़ नारा ही नहीं दिया बल्कि 25 करोड़ भारतीयों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला।
कितने ही राष्ट्रीय हित के मजबूत आर्थिक , सामाजिक और सांस्कृतिक निर्णय लेकर देश को मजबूत किया ।

कश्मीर से धारा 370 हटाई, तीन तलाक के अभिशाप से मुक्ति दिलाई, उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर, राष्ट्रीय सुरक्षा, साइंस , टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य इत्यादि के क्षेत्रों में अभूतपूर्व कार्य किया है, अयोध्या में राममंदिर बनवाया । पिछले बारह वर्षों के कुछ अद्वितीय कार्य इस प्रकार हैं:

सामाजिक कल्याण, डिजिटल क्रांति, आर्थिक विकास, यूपीआई डिजिटल पेमेंट, प्रधानमंत्री जन धन योजना, लाभार्थी के खाते में सीधा पैसा पहुंचाया, 50 करोड़ नए खाते खुलवाए, कुछ सौ एमएसएमई के स्थान पर आज 3.35 लाख एमएसएमई खोली गई, आयुष्मान भारत में पचास करोड़ लाभार्थियों को पाँच लाख तक का मुफ्त इलाज, 11 करोड़ शोचालय, दस करोड़ लोगों को मुफ्त गैस कनेक्शन, रिन्यूएबल एनर्जी को गति, चंद्रयान 3 जो चंद्रमा के दक्षिण छोर पर पहली बार उतरा, चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना।

ये सब स्पष्ट दृष्टि, एकनिष्ठ भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प से ही संभव ही पाया है।

विपक्ष यदि इन उपलब्धियों को गौण करने का प्रयास करेगा और आत्मवोलोकन नहीं करेगा तब नतीजे ऐसे ही आते रहेंगे जो पिछले बारह वर्ष से आते रहे है और दोष चुनाव आयोग एवं संवैधानिक संस्थाओं को देते रहेंगे । विनाशकाले विपरीत बुद्धि ।
राकेश शर्मा

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