Yamuna Pushta Road: नोएडा से एयरपोर्ट जाने वालों को मिलेगा नया रास्ता, 10 किमी सड़क पर 200 करोड़ खर्च
नोएडा एक्सप्रेसवे पर बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के लिए यमुना पुश्ता रोड के विस्तार की योजना तैयार की गई है। सेक्टर-135 से सेक्टर-150 तक करीब 10 किलोमीटर लंबी चार लेन सड़क बनाने का प्रस्ताव है। इसके निर्माण पर लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। सड़क बनने के बाद नोएडा से यमुना एक्सप्रेसवे और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की ओर जाने वाले वाहनों को वैकल्पिक मार्ग मिल सकेगा।
पहले इस मार्ग को छह लेन करने पर विचार किया गया था, लेकिन अब चार लेन सड़क बनाने पर सहमति बनी है। निर्माण की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को दिए जाने की तैयारी है। विभाग डीपीआर और डिजाइन तैयार करेगा, जबकि नोएडा प्राधिकरण निर्माण के लिए करीब 200 करोड़ रुपये उपलब्ध कराएगा।
मौजूदा यमुना पुश्ता रोड करीब 11 किलोमीटर लंबी और चार लेन की है। दूसरे चरण में इसे लगभग 10 किलोमीटर आगे बढ़ाने की योजना है। प्रस्तावित सड़क को यमुना एक्सप्रेसवे से एक रोटरी के जरिए जोड़ने की बात है। इससे एयरपोर्ट की दिशा में नया संपर्क मार्ग मिलेगा और प्रस्तावित सड़क से एयरपोर्ट की दूरी करीब 30 किलोमीटर रहने की संभावना बताई गई है।
नई सड़क से पुश्ता के आसपास विकसित आईटी और औद्योगिक सेक्टरों के लिए भी वैकल्पिक आवागमन मार्ग उपलब्ध होगा। दिल्ली से यमुना एक्सप्रेसवे की ओर जाने वाले वाहनों का नोएडा एक्सप्रेसवे पर दबाव कम हो सकता है। लखनऊ, मथुरा और आगरा की दिशा में जाने वाले वाहन भी इस मार्ग से यमुना एक्सप्रेसवे तक पहुंच सकेंगे।
यमुना पुश्ता रोड को मजबूत करने से यातायात व्यवस्था के साथ बाढ़ से जुड़ी चुनौतियों को नियंत्रित करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि सड़क का अंतिम स्वरूप सिंचाई विभाग की ओर से तैयार किए जाने वाले प्रस्ताव और चुने जाने वाले विकल्प पर निर्भर करेगा।
इस बीच मौजूदा पुश्ता रोड के करीब 10 किलोमीटर हिस्से की रिसर्फेसिंग का काम भी शुरू हो चुका है। गड्ढों और खराब हिस्सों की मरम्मत के साथ सड़क किनारे उगी घास और झाड़ियों की सफाई कराई जा रही है। इस कार्य पर करीब 34 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्राधिकरण रिसर्फेसिंग और संबंधित कार्यों के लिए सिंचाई विभाग को करीब 11 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही कर चुका है।
सिंचाई विभाग ने सड़क विस्तार के लिए प्राधिकरण के सामने तीन विकल्प रखे हैं। अब उपयुक्त विकल्प का चयन होने के बाद उसी के आधार पर डिजाइन और निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।


